दिल्ली सल्तनत [PYQ 2016, 2018, 2019, 2021, 2022]
UPSC प्रीलिम्स केंद्रित गाइड
PYQs
सबसे आम जाल [PYQ विश्लेषण पर आधारित]:
- प्रथम मंगोल आक्रमण: इल्तुतमिश के समय (1221), जलालुद्दीन खिलजी के समय नहीं [PYQ 2022]
- प्रशासनिक पदानुक्रम: परगना → सरकार → सूबा (आरोही क्रम) [PYQ 2021]
- जागीरदार बनाम ज़मींदार: जागीर वंशानुगत नहीं, ज़मींदार वंशानुगत [PYQ 2019]
- इक्ता प्रणाली: विदेशी मूल, प्राचीन स्वदेशी नहीं [PYQ 2019]
- आमिल: प्रभारी राजस्व संग्रहकर्ता [PYQ 2021]
- अमीर खुसरो: क़व्वाली के जनक, ख़याल और तराना के प्रवर्तक
पांच राजवंश (1206-1526 ई.) [PYQ 2018]
| राजवंश | काल | मूल | प्रमुख शासक | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|---|
| गुलाम/मामलूक | 1206-1290 | तुर्की | कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, बलबन | स्थापना काल |
| खिलजी | 1290-1320 | तुर्की | अलाउद्दीन खिलजी | बाज़ार सुधार, दक्कन विजय |
| तुगलक | 1320-1414 | तुर्की | मुहम्मद बिन तुगलक, फ़िरोज़ शाह | सबसे लंबा राजवंश |
| सैय्यद | 1414-1451 | तुर्की | - | कमजोर शासक |
| लोदी | 1451-1526 | अफ़गान | इब्राहीम लोदी | एकमात्र अफ़गान राजवंश |
UPSC प्रीलिम्स फोकस
- कुल अवधि: 320 वर्ष (1206-1526)
- 4 तुर्की + 1 अफ़गान: केवल लोदी अफ़गान/पठान थे
- समाप्त: बाबर द्वारा पानीपत के प्रथम युद्ध में (1526)
प्रमुख शासक [PYQ 2018, 2019, 2022]
गुलाम वंश (1206-1290)
कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210)
| पहलू | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| स्थिति | दिल्ली का प्रथम सुल्तान | स्थापना |
| उपाधि | "लाख बख्श" (उदार) | उपनाम |
| स्मारक | कुतुब मीनार (शुरू), कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद | वास्तुकला विरासत |
| मृत्यु | पोलो खेलते समय (1210) | अद्वितीय तथ्य |
इल्तुतमिश (1210-1236)
| पहलू | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| उपलब्धि | दिल्ली सल्तनत के वास्तविक संस्थापक | दिल्ली राजधानी बनाई |
| मंगोल खतरा | ख़्वारिज़्म शाह को शरण देने से इनकार (दिल्ली बचाई) | सामरिक निर्णय |
| मान्यता | खलीफा से मंसूर प्राप्त (1229) | वैधता |
| नवाचार | चालीसा (40 अमीर), इक्ता प्रणाली, टंका-जीतल सिक्के | प्रशासनिक सुधार |
| उत्तराधिकारी | पुत्री रज़िया को नामित | अभूतपूर्व |
रज़िया सुल्तान (1236-1240)
| पहलू | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| महत्व | दिल्ली की एकमात्र महिला सुल्तान | लैंगिक मील का पत्थर |
| शासन | 4 वर्ष, कुशल प्रशासक | संक्षिप्त लेकिन उल्लेखनीय |
| विरोध | तुर्की अमीरों ने विरोध किया | लैंगिक पूर्वाग्रह |
| अंत | अमीरों द्वारा मारी गई (1240) | दुखद अंत |
बलबन (1266-1286)
| पहलू | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| सिद्धांत | राजाओं का दैवीय अधिकार | राजनीतिक दर्शन |
| प्रथाएं | सजदा, पाइबोस, ज़िल्ल-ए-इलाही उपाधि | दरबारी समारोह |
| नीति | "रक्त और लौह" | सत्तावादी शासन |
| उपलब्धि | चालीसा की शक्ति तोड़ी | केंद्रीकरण |
खिलजी वंश (1290-1320)
अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316)
| पहलू | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| सैन्य सुधार | स्थायी सेना, दाग-हुलिया प्रणाली | भ्रष्टाचार विरोधी |
| बाज़ार सुधार | मूल्य नियंत्रण, बाज़ार नियमन | आर्थिक नीति |
| कराधान | 50% खराज (भूमि कर) | राजस्व प्रणाली |
| विजय | दक्कन जीतने वाले प्रथम | दक्षिणी विस्तार |
| दक्कन अभियान | मलिक काफूर के अभियान | सैन्य सफलता |
तुगलक वंश (1320-1414)
मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351)
| पहलू | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| राजधानी स्थानांतरण | दिल्ली से देवगिरि (विफल) | प्रशासनिक भूल |
| प्रतीक मुद्रा | चांदी के बदले पीतल/तांबा (विफल) | आर्थिक प्रयोग |
| कराधान | दोआब में भारी कर (विफल) | राजस्व आपदा |
| विभाग | दीवान-ए-कोही (कृषि) | प्रशासनिक नवाचार |
फ़िरोज़ शाह तुगलक (1351-1388)
| पहलू | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| कल्याण उपाय | नहरें, अस्पताल, मदरसे | सार्वजनिक कार्य |
| कराधान | ब्राह्मणों पर जजिया (पहली बार) | धार्मिक नीति |
| इक्ता प्रणाली | वंशानुगत बनाई | सामंतीकरण |
| स्मारक | फ़िरोज़ शाह कोटला, अशोक स्तंभ लाए | वास्तुकला विरासत |
प्रशासन [PYQ 2019, 2021]
केंद्रीय प्रशासन
| विभाग | प्रमुख | कार्य | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|
| दीवान-ए-विज़ारत | वज़ीर | वित्त | राजस्व प्रबंधन |
| दीवान-ए-आरिज़ | आरिज़-ए-ममालिक | सैन्य | सेना प्रशासन |
| दीवान-ए-इंशा | दबीर-ए-खास | पत्राचार | संचार |
| दीवान-ए-रिसालत | सद्र-उस-सुदूर | धार्मिक मामले | इस्लामी कानून |
प्रांतीय प्रशासन [PYQ 2021]
| स्तर | इकाई | प्रमुख | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|
| प्रांत | सूबा | सूबेदार | उच्चतम स्तर |
| विभाग | सरकार | फ़ौजदार | मध्य स्तर |
| जिला | परगना | शिक़दार | स्थानीय स्तर |
UPSC जाल
आकार के अनुसार आरोही क्रम: परगना → सरकार → सूबा [PYQ 2021]
राजस्व प्रणाली [PYQ 2019]
| शब्द | अर्थ | स्थिति | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|
| इक्ता | राजस्व के लिए भूमि आवंटन | गैर-वंशानुगत | सैन्य-प्रशासनिक |
| जागीर | भूमि अनुदान | गैर-वंशानुगत | राजस्व आवंटन |
| ज़मींदार | वंशानुगत भूस्वामी | वंशानुगत | स्थानीय अभिजात |
| आमिल | राजस्व संग्रहकर्ता | अधिकारी | प्रशासनिक |
UPSC प्रीलिम्स फोकस
- इक्ता प्रणाली: विदेशी मूल (प्राचीन स्वदेशी नहीं)
- जागीर: सल्तनत में वंशानुगत नहीं
- ज़मींदार: एकमात्र वंशानुगत पद
आर्थिक नीतियां [PYQ 2016, 2019]
अलाउद्दीन के बाज़ार सुधार
| सुधार | उद्देश्य | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| मूल्य नियंत्रण | वस्तुओं के मूल्य तय | आर्थिक नियमन |
| बाज़ार निरीक्षण | शहना-ए-मंडी (बाज़ार अधिकारी) | प्रशासनिक नियंत्रण |
| राशन प्रणाली | नियंत्रित वितरण | आपूर्ति प्रबंधन |
| जमाखोरी विरोधी | अटकलेबाजी रोकी | बाज़ार स्थिरता |
कराधान प्रणाली
| कर | प्रकार | दर | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|
| खराज | भूमि कर | 1/3 से 1/2 | मुख्य राजस्व |
| जजिया | गैर-मुस्लिमों पर कर | परिवर्तनीय | धार्मिक कर |
| ज़कात | इस्लामी दान कर | 2.5% | धार्मिक दायित्व |
| खम्स | युद्ध लूट का 1/5वां | 20% | सैन्य राजस्व |
सैन्य संगठन [PYQ 2018]
अलाउद्दीन के सैन्य सुधार
| सुधार | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| स्थायी सेना | प्रथम स्थायी सेना | सैन्य नवाचार |
| नकद भुगतान | सैनिकों को धन में भुगतान | पेशेवर सेना |
| दाग प्रणाली | घोड़ों पर दाग | भ्रष्टाचार विरोधी |
| हुलिया प्रणाली | सैनिकों का विवरण | पहचान सत्यापन |
सैन्य विभाग
| विभाग | कार्य | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| दीवान-ए-आरिज़ | सेना प्रशासन | सैन्य प्रबंधन |
| आरिज़-ए-ममालिक | सैन्य मंत्री | रक्षा प्रमुख |
| बरीद-ए-ममालिक | गुप्तचर | जासूसी नेटवर्क |
मंगोल आक्रमण [PYQ 2022]
आक्रमणों की समय-रेखा
| काल | शासक | मंगोल नेता | परिणाम | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|---|
| 1221 | इल्तुतमिश | चंगेज़ खान | टाला (शरण से इनकार) | प्रथम आक्रमण |
| 1241 | बलबन | - | खदेड़ा | सफल रक्षा |
| 1299-1308 | अलाउद्दीन खिलजी | कई आक्रमण | खदेड़े | बहुविध आक्रमण |
UPSC जाल
प्रथम मंगोल आक्रमण: इल्तुतमिश के समय (1221), जलालुद्दीन खिलजी के समय नहीं [PYQ 2022]
कला और वास्तुकला [PYQ 2018]
वास्तुकला विशेषताएं
| विशेषता | नवाचार | उदाहरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|
| सच्चा मेहराब | इस्लामी तकनीक | कुतुब मीनार | संरचनात्मक नवाचार |
| गुंबद | इस्लामी विशेषता | अलाई दरवाज़ा | वास्तुकला तत्व |
| मीनार | मीनार संरचना | कुतुब मीनार | प्रतिष्ठित स्मारक |
| ज्यामितीय पैटर्न | इस्लामी कला | विभिन्न मस्जिदें | सजावटी शैली |
प्रमुख स्मारक
| स्मारक | निर्माता | स्थान | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|
| कुतुब मीनार | ऐबक (शुरू), इल्तुतमिश (पूर्ण) | दिल्ली | प्रथम इस्लामी स्मारक |
| अलाई दरवाज़ा | अलाउद्दीन खिलजी | दिल्ली | पूर्ण इस्लामी वास्तुकला |
| तुगलकाबाद | गियासुद्दीन तुगलक | दिल्ली | किला शहर |
| लाल कोट | अनंगपाल तोमर | दिल्ली | पूर्व-सल्तनत |
साहित्य और संस्कृति [PYQ 2016]
अमीर खुसरो (1253-1325)
| योगदान | विवरण | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| संगीत | क़व्वाली के जनक | संगीत नवाचार |
| राग | ख़याल, तराना का सृजन | शास्त्रीय संगीत |
| भाषाएं | फ़ारसी, हिंदी, अरबी | बहुभाषी कवि |
| कृतियां | खज़ाइन-उल-फ़ुतूह, तुगलक नामा | ऐतिहासिक साहित्य |
ऐतिहासिक कृतियां
| लेखक | कृति | काल | UPSC प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|
| मिन्हाज-उस-सिराज | तबक़ात-ए-नासिरी | इल्तुतमिश | समकालीन विवरण |
| ज़ियाउद्दीन बरनी | तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही | तुगलक | राजनीतिक सिद्धांत |
| अमीर खुसरो | बहुविध कृतियां | खिलजी-तुगलक | दरबारी साहित्य |
UPSC प्रीलिम्स त्वरित तथ्य
सामान्य परीक्षा जाल
- प्रथम मंगोल आक्रमण: इल्तुतमिश काल (1221), जलालुद्दीन खिलजी नहीं
- प्रशासनिक पदानुक्रम: परगना → सरकार → सूबा (आरोही)
- वंशानुगत पद: केवल ज़मींदार, जागीरदार या इक्तादार नहीं
- इक्ता प्रणाली: विदेशी मूल, प्राचीन स्वदेशी नहीं
- एकमात्र महिला सुल्तान: रज़िया सुल्तान (1236-1240)
- एकमात्र अफ़गान राजवंश: लोदी (अन्य तुर्की थे)
महत्वपूर्ण प्रथम
- प्रथम सुल्तान: कुतुबुद्दीन ऐबक
- प्रथम महिला सुल्तान: रज़िया सुल्तान
- दक्कन जीतने वाले प्रथम: अलाउद्दीन खिलजी
- प्रथम स्थायी सेना: अलाउद्दीन खिलजी
- ब्राह्मणों पर जजिया लगाने वाले प्रथम: फ़िरोज़ शाह तुगलक
प्रमुख तिथियां
- 1206: दिल्ली सल्तनत स्थापित
- 1221: प्रथम मंगोल आक्रमण (इल्तुतमिश)
- 1236-1240: रज़िया सुल्तान का शासन
- 1296-1316: अलाउद्दीन खिलजी का शासन
- 1526: दिल्ली सल्तनत का अंत (पानीपत I)
प्रशासनिक शब्द
- चालीसा: 40 तुर्की अमीरों का समूह
- इक्ता: गैर-वंशानुगत भूमि आवंटन
- जागीर: गैर-वंशानुगत भूमि अनुदान
- ज़मींदार: वंशानुगत भूस्वामी
- आमिल: प्रभारी राजस्व संग्रहकर्ता
UPSC PYQ विश्लेषण 2015-2023 पर आधारित
- दिल्ली सल्तनत द्वारा प्रथम व्यवस्थित दक्कन अभियान :::
मंगोल आक्रमण बार-बार खदेड़े गए
- बहुविध आक्रमण सफलतापूर्वक पराजित
- 1299: दिल्ली के पास मंगोलों को हराया
- 1303: दिल्ली की मंगोल घेराबंदी हटाई
- मजबूत रक्षा ने सभी आक्रमण रोके
- यह उनके शासन की प्रमुख उपलब्धि थी
राजस्व प्रशासन - प्रथम भूमि माप
क्रांतिकारी परिवर्तन:
- भूमि माप शुरू करने वाले प्रथम सुल्तान व्यवस्थित रूप से
- खराज कर 50% तक बढ़ाया (पहले 33% से)
- दीवान-ए-मुस्तखराज: राजस्व संग्रह विभाग बनाया
- बुवाई के बाद अनुमानित उत्पादन और आधा एकत्र किया
कर संग्रह:
- भूमि ठीक से मापी
- राज्य का हिस्सा वैज्ञानिक रूप से तय
- बिचौलियों को कुचला: इक्तादारी ढीली हुई
- किसान को सीधे राज्य नियंत्रण में लाया
बाज़ार सुधार - सख्त मूल्य नियंत्रण
बाज़ार नियंत्रण प्रणाली:
- सभी वस्तुओं के मूल्य तय - अभूतपूर्व कदम
- मानकीकृत बाट और माप
- खुले बाज़ार में बेचा - "सराय-ए-अदल"
चार अलग बाज़ार:
- अनाज बाज़ार
- कपड़ा बाज़ार
- घोड़ा और मवेशी बाज़ार
- दास बाज़ार
बाज़ार अधिकारी:
- दीवान-ए-रियासत: बाज़ार नियंत्रक
- शहना-ए-मंडी: बाज़ार अधीक्षक
- दोनों सख्ती से मूल्य निगरानी करते
गुप्तचर नेटवर्क:
- उल्लंघन जांचने के लिए व्यापक जासूस प्रणाली (मुनहियान)
- उल्लंघनकर्ताओं को कड़ी सज़ा
- इसने बड़ी सेना के लिए सस्ती आपूर्ति सुनिश्चित की
चार प्रमुख प्रशासनिक सुधार
- मुफ्त अनुदान समाप्त: धार्मिक उद्देश्यों के लिए मुफ्त भूमि अनुदान नहीं
- जासूसी प्रणाली पुनर्गठित: व्यापक गुप्तचर नेटवर्क
- शराब निषेध: शराब के उपयोग पर प्रतिबंध
- अमीरों पर नियंत्रण:
- बिना अनुमति सामाजिक सभाएं नहीं
- बिना अनुमति अंतर-जाति विवाह नहीं
- अमीरों की साज़िश रोकी
धर्म का राजनीति से पृथक्करण
- उमरा (कुलीनता) नियंत्रित
- उलेमा (धार्मिक विद्वानों) को प्रशासन से दूर रखा
- शासन में धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण
- व्यावहारिक, कट्टर शासक नहीं
- जजिया एकत्र किया लेकिन धार्मिक उत्पीड़न नहीं
निर्मित स्मारक
- अलाई किला (राजस्थान)
- अलाई दरवाज़ा: कुतुब मीनार परिसर का प्रवेश द्वार
- सिरी किला: दिल्ली का तीसरा आधारभूत शहर (उनके द्वारा स्थापित)
सांस्कृतिक संरक्षण - अमीर खुसरो
- अमीर खुसरो: उनके प्रसिद्ध दरबारी कवि
- क़व्वाली के जनक: इस संगीत रूप के प्रवर्तक
- संगीत नवाचार:
- ख़याल शैली के प्रवर्तक
- तराना शैली के प्रवर्तक
- साहित्यिक कृतियां:
- तुगलकनामा लिखा
- खज़ाइन-उल-फ़ुतूह (विजयों का खज़ाना) लिखा
- मुफ्ताह-उल-फ़ुतूह लिखा
"खिलजी क्रांति" अवधारणा
"खिलजी क्रांति" क्यों कहा गया?
- तुर्की वर्चस्व का अंत → खिलजी "शुद्ध तुर्क" नहीं माने गए
- सामाजिक आधार विस्तृत → गैर-तुर्क (भारतीय मुस्लिम, हिंदू) भर्ती
- राज्य शक्ति एकाधिकार नहीं → किसी विशेष समूह की
- विस्तारवादी नीति → प्रथम व्यवस्थित क्षेत्रीय विस्तार
- नए प्रशासनिक उपाय → बाज़ार नियम, भूमि माप
- राजत्व की नई अवधारणा → राजत्व अपना औचित्य स्वयं देता है
- धर्म का पृथक्करण → सुल्तान को उलेमा मार्गदर्शन का पालन ज़रूरी नहीं
जलालुद्दीन खिलजी का उदार दृष्टिकोण (1290-96)
- समावेशी नीति → तुर्क + गैर-तुर्क को महत्वपूर्ण पद
- परोपकारी राज्य → सभी समुदायों की सद्भावना पर आधारित
- बलबन का सिद्धांत अस्वीकृत → संप्रभुता को अत्याचार से जोड़ने से इनकार
- "चींटी को भी नुकसान न पहुंचाने" की नीति (बरनी)
- हिंदू नीति → बलपूर्वक धर्मांतरण "अव्यावहारिक" माना
- अनुमति दी → मूर्ति पूजा, दिल्ली में हिंदू प्रथाएं
- दीर्घकालिक महत्व → अकबर की नीतियों का पूर्वगामी
अलाउद्दीन का राज्य सिद्धांत
- जलालुद्दीन की परोपकारिता अस्वीकृत → इसे कमज़ोरी दिखाना माना
- बलबन के सिद्धांत का पालन → भय अच्छी सरकार का आधार
- जासूस प्रणाली पुनर्जीवित → अमीरों के निजी घरों तक निगरानी
- अमीर नियंत्रित → मिलने-जुलने, पार्टी करने, बिना अनुमति विवाह से रोक
- प्रसिद्ध कथन → "मैं नहीं जानता शरा के अनुसार क्या वैध या अवैध है। राज्य के लिए जो आवश्यक समझता हूं, वही आदेश देता हूं।"
- पृथक्करण → राज्य मामले शरिया नियमों से स्वतंत्र
अलाउद्दीन खिलजी के कृषि सुधार
कृषि सुधारों की प्रमुख विशेषताएं
| सुधार | विवरण |
|---|---|
| खालिसा विस्तार | दोआब गांव सीधे नियंत्रण में (दीपालपुर से कड़ा) |
| भूमि राजस्व | उत्पादन का 50% तय |
| माप | पैमाइश (माप) मूल्यांकन का आधार |
| कर | केवल खराज + चराई (चारागाह) + घरी (घर कर) |
| भुगतान | वस्तु में गणना, नकद में मांग |
बिचौलियों पर अंकुश
ग्रामीण अभिजात वर्ग लक्षित:
- खुट, मुक़द्दम, चौधरी → चराई/घर कर देने को बाध्य
- खुटी शुल्क → संग्रह शुल्क से वंचित
- माप प्रणाली → कमज़ोरों पर बोझ डालने से रोका
- बरनी का कथन → "बलहार (निम्नतम) के स्तर पर पहुंचाए"
बिचौलिया पदानुक्रम:
- राय, राणा, रावत → सरदार (शीर्ष स्तर)
- खुट/ज़मींदार → परगना/जिला स्तर (शब्द "ज़मींदार" खुसरो द्वारा पहली बार प्रयुक्त)
- चौधरी/मुक़द्दम → ग्राम स्तर
राजस्व प्रशासन सुधार
- नए अधिकारी → मुतसर्रिफ (लेखाकार), आमिल (संग्रहकर्ता), गुमाश्ता (एजेंट)
- लेखा परीक्षा → नायब वज़ीर शरफ क़ैस ने कड़ाई से लेखा परीक्षा की
- ग्राम पटवारी → बही (खाता बही) पहली बार रखी गई
- कड़ी सज़ा → जीतल बकाया के लिए भी
- भ्रष्टाचार विरोधी → पर्याप्त वेतन लेकिन रिश्वत के लिए कड़ी सज़ा
कृषि सुधारों के प्रभाव
- ✅ बाज़ार अर्थव्यवस्था वृद्धि → गांवों में
- ✅ नगर-ग्राम एकीकरण → अभिन्न संबंध विकसित
- ✅ मानक स्थापित → बाद में शेर शाह और अकबर के लिए
- ❌ किसान प्रभावित → न्यूनतम पर छोड़े गए
- ❌ अस्थायी → मुबारक शाह ने खुट/मुक़द्दम विशेषाधिकार बहाल किए
अलाउद्दीन खिलजी के बाज़ार सुधार
बाज़ार सुधारों का उद्देश्य
- प्राथमिक → मंगोल घेराबंदी के बाद सस्ते में बड़ी सेना रखना
- वेतन कमी → घुड़सवार को 238 टंका वार्षिक (मूल्य नियंत्रण के साथ)
- द्वितीयक → विद्रोह रोकने के लिए हिंदुओं को निर्धन बनाना (बरनी)
दिल्ली में तीन बाज़ार स्थापित
| बाज़ार | वस्तुएं | नियंत्रक |
|---|---|---|
| 1. खाद्य बाज़ार | अनाज | शहना-ए-मंडी |
| 2. सराय-ए-अदल | कपड़ा, चीनी, घी, तेल, मेवा | गुप्तचर अधिकारी |
| 3. घोड़ा बाज़ार | घोड़े, दास, मवेशी | अलग शहना |
खाद्य बाज़ार नियम
- राजकीय भंडार → दिल्ली में बफर स्टॉक के लिए
- झैन क्षेत्र → 1/4 उत्पादन वस्तु में भंडार के लिए लिया
- बंजारे/कारवानियां → यमुना तट पर निगम बनाने का आदेश
- दोआब (100 कोस) → किसान मंडियों में बेचें, घर न ले जाएं
- जमाखोरी (इहतिकार) नहीं → निषेध; उल्लंघनकर्ताओं का अनाज जब्त
- व्यक्तिगत सीमा → किसान अपने लिए केवल 10 मन रखें
- राशनिंग → कमी के दौरान; एक समय में व्यक्ति को 1/2 मन
अलाउद्दीन के तहत मूल्य सूची
| वस्तु | मूल्य (जीतल प्रति मन) |
|---|---|
| गेहूं | 7.5 |
| जौ | 4 |
| उत्तम चावल | 5 |
| चना | 5 |
नोट: 48-50 जीतल = 1 टंका (चांदी)
क्षेत्रीय विस्तार के तीन चरण
| चरण | क्षेत्र | प्रकृति |
|---|---|---|
| चरण 1 | गुजरात, राजस्थान, मालवा | प्रत्यक्ष नियंत्रण |
| चरण 2 | महाराष्ट्र, दक्कन | जागीरदारी, कर |
| चरण 3 | संपूर्ण दक्कन, बंगाल | विलय (गियासुद्दीन तुगलक) |
खिलजी वंश त्वरित तथ्य
- 1290: जलालुद्दीन ने वंश स्थापित (कैक़ुबाद की हत्या)
- 1296: अलाउद्दीन ने चाचा की हत्या की, सुल्तान बना
- 1299: गुजरात विजय; मलिक काफूर प्राप्त
- 1301: रणथंभौर विजय
- 1303: चित्तौड़ विजय; भारी मंगोल आक्रमण खदेड़ा
- 1305: मालवा विलय (ऐनुल मुल्क मुल्तानी)
- 1308-11: दक्कन अभियान (काफूर)
- 1316: अलाउद्दीन की मृत्यु; मलिक काफूर मारा गया
- 1320: खुसरो खान (अंतिम खिलजी) मारा गया → तुगलक वंश
तुगलक वंश (1320-1414)
सल्तनत काल में अधिकतम क्षेत्रीय साम्राज्य
गियासुद्दीन तुगलक (1320-1325)
स्थापना और सुधार
- 1320: तुगलक वंश स्थापित
- मजबूत शासक और कुशल प्रशासक
- तुर्की मूल; मंगोलों के विरुद्ध सीमा रक्षक
- खिलजियों के बाद सत्ता पर काबिज बरादुस (नवमुस्लिम) के विरुद्ध विद्रोह
विलय की नीति
- अलाउद्दीन की दूरस्थ राज्यों की गैर-विलय नीति अस्वीकृत
- औपचारिक समर्पण और कर से संतुष्ट नहीं
- प्रत्यक्ष नियंत्रण विस्तारित:
- वारंगल (तेलंगाना)
- माबर (कोरोमंडल)
- मदुरै (तमिलनाडु)
- द्वार समुद्र (कर्नाटक)
कल्याण नीति - "संयम की नीति"
- खराज (भूमि कर) 20% तक घटाया (अलाउद्दीन के 50% से)
- कृषि और हस्तशिल्प के महत्व की पहली मान्यता
- खेती का निरंतर विस्तार आवश्यक
- अलाउद्दीन की माप को बदला उत्पादन की साझेदारी से (फसल विफल होने पर लाभदायक)
- निर्देश: कराधान वृद्धि क्रमिक हो, किसानी समृद्धि प्रभावित न हो
- अलाउद्दीन के अमीर परिवारों पर मृदुता
- सिंचाई कार्य प्रोत्साहित
स्मारक
- दिल्ली में तुगलकाबाद किला
- विशाल रक्षात्मक संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध
- ढलान वाली दीवारें (बैटर) - विशिष्ट तुगलक शैली
मृत्यु - रहस्यमय परिस्थितियां (1325)
- 1325: रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु
- सफल बंगाल अभियान से लौटते समय
- लकड़ी का मंडप ढहा स्वागत समारोह में
- मंडप पुत्र मुहम्मद (उलुग खान) द्वारा बनाया
- निज़ामुद्दीन औलिया के साथ षड्यंत्र का संदेह
- संरचना (कुश्क) कथित रूप से बिना नींव के बनी, ढहने के लिए डिज़ाइन
- मुहम्मद ने जाना गियासुद्दीन उन्हें दिल्ली से हटाने का निश्चय
मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351)
"बुद्धिमान मूर्ख" / "दुर्भाग्यवान प्रतिभाशाली"
चरित्र और पृष्ठभूमि
- जन्म नाम: जौना खान
- "बुद्धिमान मूर्ख" कहलाए - शानदार विचार, खराब क्रियान्वयन
- "विपरीतों का मिश्रण" - प्रतिभाशाली और पागल
- "तर्कवादी" (बरनी) - तार्किक प्रमाण के बिना कुछ स्वीकार नहीं
- सुशिक्षित: दर्शन, गणित, चिकित्सा, धर्म, काव्य
- व्यक्तिगत धार्मिक पालन में कड़े
- लेकिन अंधा कट्टरवादी नहीं
धार्मिक नीति - उदार
- अजमेर में मुईनुद्दीन चिश्ती की कब्र पर जाने वाले प्रथम सुल्तान
- निज़ामुद्दीन औलिया सहित सूफी संतों की कब्रों पर मकबरे बनाए
- योगियों और जैन संतों से जुड़े (राज शेखर, जिनप्रभा सूरी)
- गुजरात में जैन मंदिरों का दौरा, अनुदान दिए
- होली जैसे हिंदू त्योहारों से जुड़े
- खलीफा की वैधता मांगी (1339) - सिक्कों पर अब्बासी खलीफा का नाम
इब्न बतूता का विवरण
- इब्न-ए-बतूता: मोरक्को यात्री (1333-47 ई.)
- सुल्तान ने क़ाज़ी (मुख्य न्यायाधीश) बनाया
- "रिहला" (यात्रा वृतांत) लिखा
- तुगलक के शासन का विस्तृत विवरण
- समाज के बारे में ज़्यादा नहीं लिखा
- दरबारी मामलों और सुल्तान की नीतियों पर केंद्रित
- मुहम्मद को "दुनिया के चार सबसे शक्तिशाली शासकों" में से एक कहा
- अन्य तीन: चीन, इराक, उज़्बेकों का राजा
पांच विवादास्पद/विफल प्रयोग
1. दोआब में कराधान + कृषि सुधार
- समस्या: गंगा-यमुना दोआब में कराधान भारी बढ़ाया
- कृषि ऋण:
- सोंधर ऋण (सस्ते कृषि ऋण) दिए
- किसानों को तक़ावी ऋण
- लेकिन लोगों ने इन ऋणों का दुरुपयोग किया
- परिणाम: भारी कराधान + सूखा : अकाल : विद्रोह : विफलता
2. राजधानी स्थानांतरण
- से: दिल्ली को: देवगिरी/दौलताबाद (दक्कन)
- कारण: राज्य के केंद्र में राजधानी बनाना
- क्रियान्वयन:
- दिल्ली की पूरी आबादी का बलपूर्वक पलायन
- आदेश का कठोर निष्पादन
- समस्याएं:
- देवगिरी में पानी की कमी
- दिल्ली सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रही
- पलायन में लोगों को कष्ट
- परिणाम: दिल्ली वापस स्थानांतरण - पूर्ण विफलता
3. प्रतीक मुद्रा (पीतल मुद्रा)
- नवाचार: चांदी टंका के समान मूल्य के पीतल/तांबे के सिक्के जारी
- विचार: 1 पीतल टंका = 1 चांदी जीतल मूल्य में
- समस्या:
- व्यापक जालसाज़ी - कोई भी पीतल सिक्के बना सकता था
- नकली रोकने का कोई तंत्र नहीं
- लोगों ने चांदी जमाखोरी की, पीतल में कर दिया
- परिणाम:
- खज़ाना पीतल से भरा, लोगों ने चांदी छिपाई
- पीतल वापस लेना और चांदी से बदलना पड़ा
- भारी वित्तीय हानि
4. खुरासान (मध्य एशिया/इराक) अभियान
- योजना: खुरासान क्षेत्र जीतना चाहा
- समस्या:
- बहुत महंगा अभियान
- दूरी बहुत अधिक
- लॉजिस्टिक दुःस्वप्न
- परिणाम: छोड़ना पड़ा - संसाधनों की बर्बादी
5. कुराचिल/क़राचिल अभियान (हिमालय)
- योजना: कुराचिल (हिमाचल प्रदेश) जीतने का अभियान
- समस्या: हिमालय पार करना था
- परिणाम: पूर्ण आपदा - कठिन भूभाग, मौसम ने सेना नष्ट की
सफल प्रशासनिक नवाचार
दीवान-ए-कोही (कृषि विभाग):
- भारत में पहला कृषि विभाग
- नकदी फसलों को प्रोत्साहन
- तक़ावी (कृषि ऋण) वितरित
- किसानों को सोंधर (ऋण) प्रदान
नए कर शुरू:
- घरी: घर कर
- चराही: चारागाह कर
जहांपनाह बनाया - दिल्ली का चौथा शहर
उनके शासन में विद्रोह
विफल प्रयोगों के कारण:
- 22 प्रमुख विद्रोह हुए
- बंगाल पर से नियंत्रण खोया
- दक्कन प्रांत स्वतंत्र हुए
- वारंगल, मदुरै अलग हुए
फ़िरोज़ शाह तुगलक (1351-1388)
"महान निर्माता" और "कल्याण राजा" लेकिन रूढ़िवादी
चरित्र और उत्तराधिकार
- मुहम्मद बिन तुगलक के चचेरे भाई
- मुहम्मद के थट्टा (1351) में सेना छोड़ने के बाद उत्तराधिकारी
- सल्तनत का पतन शुरू उनके तहत
- सार्वजनिक कार्यों के लिए "कल्याण राजा" कहलाए
- फ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़ शाही (आत्मकथा) के लेखक
- बहुत रूढ़िवादी सुन्नी मुस्लिम (बाद के वर्षों में और कट्टर)
- धार्मिक कठोरता वापस लाई
परोपकार और समझौते की नीति
- कठोर दंड समाप्त; अत्याचार नहीं, विकृतीकरण नहीं
- मुहम्मद के कृषि ऋणों का 2 करोड़ टंका माफ
- धर्मशास्त्रियों को किराया-मुक्त भूमि (इनाम, इद्रार) बहाल
- उनके शासन में समृद्धि: अफीफ कहते हैं "बिना प्रयास सर्वत्र सस्तापन"
- जमा (राजस्व निर्धारण) 6 करोड़ 75 लाख टंका; शासन में संशोधित नहीं
इक्ता प्रणाली पुनर्जीवन
- इक्ता प्रणाली पुनर्जीवित और वंशानुगत बनाई
- पहले यह गैर-वंशानुगत थी (इल्तुतमिश ने गैर-वंशानुगत बनाई)
- इससे केंद्रीय नियंत्रण कमज़ोर हुआ
सैन्य सुधार - वंशानुगत सिद्धांत
- दक्कन पुनः जीतने का प्रयास नहीं (क्षेत्र खोया)
- सेना और इक्ता में वंशानुगत सिद्धांत शुरू
- सैनिकों को नकद भुगतान नहीं अब
- बजाय गांवों के भूमि राजस्व (वजेहा) से भुगतान
- इससे सैन्य दक्षता कमज़ोर हुई
कल्याण उपाय - "कल्याण सुल्तान"
बुनियादी ढांचा:
- सतलज और यमुना से नहरें बनाईं
- हक़-ए-शिर्ब: सिंचाई पर 10% कर
- सिंचाई के लिए 5 प्रमुख नहरें बनाईं
सामाजिक कल्याण:
- अस्पताल बनाए - "दार-उल-शिफ़ा" (शिफ़ा खाना)
- यतीम-खाना बनाया - विधवा गृह/अनाथालय
- विवाह ब्यूरो - गरीब लड़कियों के विवाह में सहायता
- रोज़गार ब्यूरो - नौकरियां प्रदान
विभाग बनाए:
- दीवान-ए-खैरात: गरीब लड़कियों का विवाह (दान)
- दीवान-ए-बंदगान: रोज़गार ब्यूरो (दासों के लिए)
- दीवान-ए-इस्तिककाक: वृद्धावस्था पेंशन
धार्मिक नीति - रूढ़िवादी
सख्त इस्लामी प्रवर्तन:
- गैर-मुस्लिमों से जजिया संग्रह
- ब्राह्मणों पर भी जजिया लागू (पहले छूट थी)
- महिलाओं और बच्चों पर भी लागू
- उलेमा (रूढ़िवादी विद्वानों) को खुली छूट
- हिंदू मंदिरों पर आक्रमण
- सूफी दरगाहों में महिला प्रवेश वर्जित
- ब्रह्महत्या दंड - कड़ी सज़ा
वास्तुकला विरासत - "महान निर्माता"
- 300 शहर और कस्बे बनाए
- दिल्ली सल्तनत के "महान निर्माता" कहलाए
प्रमुख निर्माण:
- "दार-उल-शिफ़ा": दिल्ली में अस्पताल (दान अस्पताल)
- फ़िरोज़ शाह कोटला शहर
- फ़िरोज़ शाह कोटला किला
- हिसार (हरियाणा)
- फ़तेहाबाद (हरियाणा)
- फ़िरोज़ाबाद (उ.प्र.) - दिल्ली का 5वां आधारभूत शहर
- जौनपुर (उ.प्र.)
दरबारी इतिहासकार - ज़ियाउद्दीन बरनी
- ज़ियाउद्दीन बरनी - उनके दरबार में प्रसिद्ध इतिहासकार
- कृतियां:
- "तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही": कई पूर्व शासकों का भी इतिहास
- "फ़तवा-ए-जहांदारी": प्रशासन और नैतिकता पर
- दिल्ली सल्तनत इतिहास के दस्तावेज़ीकरण में बहुत प्रभावशाली
नासिरुद्दीन मोहम्मद तुगलक (1395-1414)
तैमूर का आक्रमण - तुगलकों का अंत
- 1398: तैमूर (तामेरलेन) ने भारत पर आक्रमण
- दिल्ली पूर्णतः लूटी
- नरसंहार और लूट
- खिज़्र खान को शासन के लिए नामित
- इससे प्रभावी रूप से तुगलक शक्ति समाप्त
सैय्यद वंश (1414-1452)
तैमूर के आक्रमण के बाद स्थापना
- खिज़्र खान ने वंश स्थापित (तैमूर द्वारा नामित)
- कमज़ोर शासक, अप्रभावी प्रशासन
- क्षेत्र काफी कम - दिल्ली और आसपास तक सीमित
- 1398 के तैमूर आक्रमण के बाद स्थापित
चार शासक
- खिज़्र खान (1414-1421): संस्थापक, पहले शासक
- मुबारक शाह (1421-1434): दूसरे शासक
- मुहम्मद शाह (1434-1445): तीसरे शासक
- अलाउद्दीन आलम शाह (1445-1451): अंतिम शासक, बहलोल लोदी के पक्ष में त्याग
पतन और कमज़ोरी
- लघु अवधि: केवल 37 वर्ष
- सीमित क्षेत्र: केवल दिल्ली और आसपास तक सीमित
- कमज़ोर नियंत्रण: प्रांत स्वतंत्र हुए
- आर्थिक पतन: खज़ाना खाली
लोदी वंश (1451-1526)
प्रथम अफ़गान वंश (अफ़गान/पठान)
बहलोल लोदी (1451-1489)
स्थापना
- दिल्ली सल्तनत का पहला अफ़गान वंश
- 1451: सैय्यदों को शांतिपूर्वक बदला (आलम शाह ने त्याग किया)
- क्षेत्र विस्तारित काफी - पंजाब पुनः जीता
- जौनपुर विजय: जौनपुर राज्य जीता और विलय किया
चरित्र और प्रशासन
- सादा जीवन: विनम्र जीवनशैली
- अफ़गान कबीलाई समानता बनाए रखी
- अमीरों को समान माना: भाई कहा
- अफ़गान परंपराएं पुनर्जीवित
सिकंदर लोदी (1489-1517)
कुशल प्रशासन
- मजबूत प्रशासक और कुशल शासक
- गज़-ए-सिकंदरी: नया माप मानक शुरू
- कृषि प्रोत्साहित: विकास व्यापक
- नहरें: सिंचाई सुविधाएं सुधारीं
राजधानी और शहरी विकास
- आगरा शहर स्थापित 1504/1506 में
- राजधानी विचार: दिल्ली और आगरा के बीच फोकस बदला
- राज्य नियंत्रण के लिए सामरिक स्थान
गुप्तचर प्रणाली
- बरीद-ए-ममालिक: गुप्तचर विभाग प्रमुख
- व्यवस्थित जासूस नेटवर्क बनाया
- अमीरों और प्रांतों की निगरानी
धार्मिक नीति - असहिष्णु
- हिंदुओं के प्रति असहिष्णु: सख्त उपाय
- मंदिर विनाश: कई मंदिरों के विनाश का आदेश
- जजिया संग्रह: कड़ाई से लागू
- धर्मनिरपेक्ष नहीं: पहले के सुल्तानों के विपरीत
- संतों की दरगाहों में महिला प्रवेश वर्जित
इब्राहीम लोदी (1517-1526)
दिल्ली सल्तनत के अंतिम सुल्तान
चरित्र - अहंकारी शासक
- अहंकारी शासक: अमीरों में अलोकप्रिय
- अमीरों से कठोर व्यवहार: अफ़गान परंपराएं त्यागीं
- अफ़गान कबीलाई रीतियां उपेक्षित: असंतोष पैदा
- निरंकुश: अमीरों से परामर्श नहीं
पतन - पानीपत का प्रथम युद्ध (1526)
- तिथि: 21 अप्रैल 1526
- प्रतिद्वंद्वी: बाबर (फ़रगाना से मुगल आक्रांता)
- इब्राहीम की सेना: 100,000 सैनिक, 1,000 हाथी
- बाबर की सेना: केवल 12,000-15,000 सैनिक
- बाबर का लाभ:
- अनुशासित सेना
- तोपखाना और बारूद (भारत में पहला प्रयोग)
- तुलुगमा रणनीति (शत्रु को घेरना)
- बंदूकें और तोपें
- परिणाम: इब्राहीम लोदी युद्ध में मारा गया
- महत्व: दिल्ली सल्तनत का अंत, मुगल साम्राज्य की शुरुआत
विश्वासघात
- कई अफ़गान अमीरों ने बाबर का साथ दिया
- दौलत खान लोदी (पंजाब के गवर्नर) ने बाबर को आमंत्रित
- आंतरिक विभाजन ने दिल्ली सल्तनत को कमज़ोर किया
प्रशासनिक विभाग (दीवान)
विभिन्न सुल्तानों द्वारा स्थापित प्रमुख विभाग
| विभाग | स्थापनाकर्ता | कार्य |
|---|---|---|
| दीवान-ए-विज़ारत | इल्तुतमिश | वित्त |
| दीवान-ए-आरिज़ | बलबन | सेना / सैन्य मामले |
| दीवान-ए-रियासत | अलाउद्दीन खिलजी | बाज़ार नियंत्रण |
| दीवान-ए-मुस्तखराज | अलाउद्दीन खिलजी | राजस्व संग्रह |
| दीवान-ए-कोही | मुहम्मद बिन तुगलक | कृषि विभाग |
| दीवान-ए-खैरात | फ़िरोज़ शाह तुगलक | गरीब लड़कियों का विवाह (दान) |
| दीवान-ए-बंदगान | फ़िरोज़ शाह तुगलक | रोज़गार ब्यूरो (दास) |
| दीवान-ए-इस्तिककाक | फ़िरोज़ शाह तुगलक | वृद्धावस्था पेंशन |
| बरीद-ए-ममालिक | सिकंदर लोदी | गुप्तचर अधिकारी |
| दीवान-ए-इंशा | - | डाक और पत्र |
| दीवान-ए-रिसालत | - | धर्म / धार्मिक मामले |
| दीवान-ए-मुनिहा | - | जासूस |
| क़ाज़ी विभाग | - | न्यायिक |
कराधान प्रणाली
क़ुरान में चार प्रकार के कर
1. जजिया (गैर-मुस्लिम कर)
- गैर-मुस्लिमों पर लगाया कर
- पहले शुरू: कुतुबुद्दीन ऐबक
- प्रारंभ में: ब्राह्मणों, महिलाओं और बच्चों पर नहीं
- फ़िरोज़ शाह तुगलक: ब्राह्मणों, महिलाओं और बच्चों पर जजिया लागू
- अकबर: जजिया पूर्णतः समाप्त
- औरंगज़ेब: जजिया पुनः लागू
2. ज़कात (संपत्ति कर)
- संपत्ति पर 2% कर
- मुसलमानों के लिए धार्मिक दायित्व
- दानार्थ उपयोग
3. खराज (भूमि कर)
- उत्पादन का 1/10 भूमि कर
- मूल वितरण:
- 1/5 सुल्तान को
- 4/5 सैनिकों को
- अलाउद्दीन खिलजी ने उलट दिया:
- 4/5 सुल्तान को
- 1/5 सैनिकों को
- अलाउद्दीन खिलजी द्वारा 50% तक बढ़ाया (1/3 से)
4. खम्स (लूट कर)
- युद्ध में पकड़ी लूट का 1/5
- योद्धाओं और खज़ाने में वितरित
PW प्लस इनसाइट्स (UDAAN)
प्रीलिम्स के लिए रोचक दिल्ली सल्तनत तथ्य
कुतुबुद्दीन - लाखों देने वाला राजा: कुतुबुद्दीन ऐबक की उपाधि "लाख बख्श" अतिशयोक्ति नहीं थी। समकालीन विवरण बताते हैं कि वे नियमित रूप से सैनिकों और आश्रितों को लाखों सिक्के बांटते थे, उस समय के सबसे उदार शासकों में से एक की प्रतिष्ठा अर्जित करते हुए।
रूमी युद्ध - आधुनिक रणनीति: पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) में बाबर ने "रूमी" (उस्मानी) नामक नई युद्ध तकनीक का उपयोग किया। उनकी सेना ने इब्राहीम लोदी को किनारों से फंसाया, जबकि तीर और उस्मानी बंदूकें केंद्र से मारीं, खाइयों और गाड़ियों से सुरक्षित - दिखाते हुए कैसे योजना और गोलाबारी ने संख्या को हराया।
मुहम्मद बिन तुगलक के प्रयोगात्मक खेत: मुहम्मद बिन तुगलक ने दीवान-ए-कोही बनाया, जहां राज्य ने गेहूं और अन्य फसलें उगाने के लिए प्रयोगात्मक खेत चलाए — सुल्तान की दृष्टि से निर्देशित नियोजित खेती और फसल विविधीकरण का प्रारंभिक प्रयास।
आधुनिक राज्य से पहले स्वास्थ्य देखभाल: फ़िरोज़ शाह तुगलक ने दार-उल-शिफ़ा नामक राज्य-संचालित अस्पताल बनाए, जहां इलाज मुफ्त था और डॉक्टरों को सरकार भुगतान करती थी — मध्यकालीन भारत में सार्वजनिक वित्तपोषित स्वास्थ्य देखभाल का प्रारंभिक उदाहरण।
इल्तुतमिश - वास्तविक संस्थापक: हालांकि ऐबक ने सल्तनत स्थापित की, इल्तुतमिश ने दिल्ली को राजधानी बनाया, चांदी का टंका और तांबे का जीतल शुरू किया, और खलीफा से मान्यता प्राप्त की — उन्हें दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संगठक बनाते हुए।
प्रतीक मुद्रा आपदा: मुहम्मद बिन तुगलक का प्रतीक मुद्रा प्रयोग विफल हुआ क्योंकि कोई भी घर पर पीतल के सिक्के बना सकता था। खज़ाना बेकार पीतल से भर गया जबकि लोगों ने चांदी जमाखोरी की — प्रवर्तन तंत्र के बिना मौद्रिक नीति के बारे में चेतावनी कथा।
दिल्ली सल्तनत प्रवृत्तियों में (UPSC पैटर्न)
हाल के परीक्षा फोकस क्षेत्र
| विषय | हाल का प्रश्न पैटर्न | UPSC वर्ष |
|---|---|---|
| मंगोल आक्रमण | प्रथम आक्रमण इल्तुतमिश के समय (खिलजी नहीं) | 2022 |
| प्रशासनिक शब्द | आमिल, इक्तादार, जागीरदार अंतर | 2019, 2021 |
| मुहम्मद बिन तुगलक | पांच प्रयोग, विफलताएं | मूल विषय |
| अलाउद्दीन के सुधार | बाज़ार सुधार, सेना सुधार | बार-बार |
| अमीर खुसरो | क़व्वाली, संगीत नवाचार | 2019 |
सामान्य जाल:
- ❌ प्रथम मंगोल आक्रमण इल्तुतमिश के समय (जलालुद्दीन खिलजी नहीं)
- ❌ जागीर वंशानुगत नहीं थी; इक्ता भी प्रारंभ में गैर-वंशानुगत
- ❌ 5 में से 4 सल्तनत राजवंश तुर्की थे (केवल लोदी अफ़गान)
- ✅ आमिल परगना स्तर पर राजस्व संग्रहकर्ता था
- ✅ फ़िरोज़ तुगलक ने इक्ता वंशानुगत बनाई (केंद्रीय शक्ति कमज़ोर)
- ✅ सैय्यदों को "कुलाह-दारान" (नुकीली टोपी वाले) कहा जाता था
त्वरित संदर्भ तालिकाएं (UDAAN)
पांच राजवंश एक नज़र में
| राजवंश | काल | संस्थापक | महानतम शासक | प्रमुख उपलब्धि |
|---|---|---|---|---|
| गुलाम/मामलूक | 1206-1290 | ऐबक | इल्तुतमिश | इक्ता प्रणाली, टंका |
| खिलजी | 1290-1320 | जलालुद्दीन | अलाउद्दीन | बाज़ार सुधार, दक्कन विजय |
| तुगलक | 1320-1414 | गियासुद्दीन | फ़िरोज़ | कल्याण उपाय, सिंचाई |
| सैय्यद | 1414-1451 | खिज़्र खान | — | संक्रमणकालीन शासक |
| लोदी | 1451-1526 | बहलोल | सिकंदर | आगरा स्थापित, गज़-ए-सिकंदरी |
महत्वपूर्ण सल्तनत शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| इक्ता | राजस्व आवंटन (प्रारंभ में गैर-वंशानुगत) |
| टंका | इल्तुतमिश द्वारा शुरू चांदी का सिक्का |
| जीतल | तांबे का सिक्का |
| खराज | हिंदू-धृत भूमि पर भूमि कर |
| उश्र | मुस्लिम-धृत भूमि पर कर (1/10) |
| दीवान-ए-आरिज़ | सैन्य विभाग |
| दीवान-ए-विज़ारत | राजस्व/वित्त विभाग |
| शहना-ए-मंडी | बाज़ार अधीक्षक |
| दार-उल-शिफ़ा | राज्य-संचालित अस्पताल |
| दीवान-ए-कोही | कृषि विभाग |