MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम)
परिभाषा
MSME वर्गीकरण (MSMED अधिनियम, 2006)
विनिर्माण (संयंत्र और मशीनरी में निवेश):
| श्रेणी | निवेश |
|---|---|
| सूक्ष्म | ≤ ₹25 लाख |
| लघु | ≤ ₹5 करोड़ |
| मध्यम | ≤ ₹10 करोड़ |
सेवा (उपकरण में निवेश):
| श्रेणी | निवेश |
|---|---|
| सूक्ष्म | ≤ ₹10 लाख |
| लघु | ≤ ₹2 करोड़ |
| मध्यम | ≤ ₹5 करोड़ |
नया वर्गीकरण (2018 संशोधन)
वार्षिक कारोबार (ATO) पर आधारित:
| श्रेणी | वार्षिक कारोबार |
|---|---|
| सूक्ष्म | < ₹5 करोड़ |
| लघु | ₹5 करोड़ - ₹75 करोड़ |
| मध्यम | ₹75 करोड़ - ₹250 करोड़ |
केंद्र सरकार सीमा 3x तक बदल सकती
मुख्य तथ्य
MSME आंकड़े (NSS 73वां दौर, 2015-16)
- कुल MSMEs: 633.88 लाख
- ग्रामीण: 324.88 लाख
- शहरी: 309 लाख
- 99% सूक्ष्म + 0.52% लघु + 0.01% मध्यम
- UP में सबसे अधिक MSMEs (14.20%)
- क्षेत्र: 31% विनिर्माण, 36% व्यापार, 33% अन्य सेवाएं
अर्थव्यवस्था में योगदान
आर्थिक योगदान
| मापदंड | योगदान |
|---|---|
| विनिर्माण GDP | 6.11% |
| सेवा क्षेत्र | 24.63% |
| विनिर्माण उत्पादन | 33.4% |
| निर्यात | कुल निर्यात का 45% |
| रोजगार | 120 मिलियन व्यक्ति |
| विकास दर | >10% |
सामना की गई समस्याएं
MSME क्षेत्र की चुनौतियां
- क्रेडिट तक पहुंच: कुल क्रेडिट का केवल 17.4% (आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18)
- खराब अवसंरचना
- आधुनिक तकनीक तक पहुंच
- बाजारों तक पहुंच
- कानूनी बाधाएं: बिजली, पर्यावरण, श्रम मंजूरी
- कुशल जनशक्ति का अभाव
सरकारी पहल
प्रमुख MSME योजनाएं
| योजना | उद्देश्य |
|---|---|
| CGTMSE | क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंड (MSME मंत्रालय + SIDBI) |
| MSME समाधान | विलंबित भुगतान शिकायतों के लिए पोर्टल |
| बाज़ार सहायता योजना | प्रदर्शनियों/व्यापार मेलों में भागीदारी |
| SFURTI | पारंपरिक उद्योगों के पुनर्जनन के लिए कोष |
| ASPIRE | नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता प्रोत्साहन |
| MSE-CDP | क्लस्टर विकास कार्यक्रम |
| NMCP | राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता कार्यक्रम |
| TCSP | प्रौद्योगिकी केंद्र प्रणाली कार्यक्रम |
| मुद्रा | सूक्ष्म इकाई विकास और पुनर्वित्त एजेंसी (SIDBI के तहत) |
| CLCSS | क्रेडिट लिंक्ड पूंजी सब्सिडी (15% सब्सिडी, अधिकतम ₹15 लाख) |
| PMEGP | प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम |
| उद्योग आधार (UAM) | सरलीकृत पंजीकरण |
समर्थन और आउटरीच पहल (हालिया)
- 59-मिनट ऋण पोर्टल (₹1 करोड़ तक)
- GST-पंजीकृत MSMEs के लिए 2% ब्याज सब्वेंशन
- TReDS: व्यापार प्राप्य ई-डिस्काउंटिंग सिस्टम (कारोबार > ₹500 करोड़ के लिए)
- PSU खरीद: 25% (पहले 20% से); महिला उद्यमियों के लिए 3%
- प्रौद्योगिकी: 20 हब + 100 टूल रूम
आगे का रास्ता
MSME के लिए आगे का रास्ता
- आसान, परेशानी-मुक्त क्रेडिट पहुंच विस्तृत करें
- कड़े NPA मानदंड
- अवसंरचना विकास
- नवाचारी उत्पादन के लिए R&D
- क्रेडिट और प्रदर्शन रेटिंग
- कौशल विकास और प्रशिक्षण
CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो)
बुनियादी तथ्य
CBI अवलोकन
- DoPT (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) के तहत
- इंटरपोल समन्वय के लिए नोडल एजेंसी
- उत्पत्ति: DSPE अधिनियम, 1946
- स्थापित: 1963
- सिफारिश: संथानम समिति (1962-64)
CBI के मुद्दे
आंतरिक मुद्दे
- अपना कैडर नहीं: प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी → सरकारी हेरफेर के प्रति संवेदनशील
- आंतरिक संघर्ष: निदेशक बनाम विशेष निदेशक आरोप
- कम दोषसिद्धि दर: भ्रष्टाचार मामलों में केवल 3% (संसदीय पैनल)
बाहरी मुद्दे
- राजनीतिक दबाव: SC ने "पिंजरे का तोता" कहा (2013)
- कोई वैधानिक संरक्षण नहीं: चार्टर विधान द्वारा संरक्षित नहीं
- जांच में देरी: SC/HC से संवेदनशील मामले बिना अतिरिक्त जनशक्ति के
- HR और अवसंरचना चुनौतियां
- राज्य सरकारों पर निर्भरता: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी राज्य सहमति आवश्यक
- दुरुपयोग आरोप: विपक्षी दलों को निशाना
- ओवरलैपिंग कार्य: CVC, CBI, लोकपाल क्षेत्राधिकार ओवरलैप
- RTI बहिष्करण: पारदर्शिता चिंताएं
सहमति मुद्दा
राज्य सहमति और वापसी
दो प्रकार की सहमति:
- मामला-विशिष्ट
- सामान्य
वापसी का अर्थ:
- उस राज्य में नए मामले पंजीकरण नहीं
- पुराने मामले जारी
- कहीं और पंजीकृत मामले जिनमें राज्य निवासी शामिल जारी रह सकते
- CrPC धारा 166: एक क्षेत्राधिकार का अधिकारी दूसरे से तलाशी करने को कह सकता
दिल्ली HC आदेश (अक्टूबर 2018):
- CBI उस राज्य में किसी की भी जांच कर सकती जिसने सहमति वापस ली अगर मामला उस राज्य में पंजीकृत नहीं
- CBI दिल्ली में मामले पंजीकृत कर सकती अगर अपराध का हिस्सा दिल्ली से जुड़ा
प्रमुख सुधार
प्रमुख सुधार
| सुधार | विवरण |
|---|---|
| विनीत नारायण बनाम UoI (1998) | समिति द्वारा निदेशक नियुक्ति (CVC + सतर्कता आयुक्त + सचिव गृह/कार्मिक); निश्चित 2 वर्ष कार्यकाल |
| CVC अधिनियम, 2003 | CVC को वैधानिक दर्जा |
| लोकपाल अधिनियम, 2013 | समिति: PM (अध्यक्ष) + LoP + CJI नामित |
समिति सिफारिशें
सुधार समितियां
| समिति | सिफारिश |
|---|---|
| पी. सिंह समिति, 1978 | व्यापक केंद्रीय विधान |
| जसवंत सिंह (प्राक्कलन समिति, 1991-92) | CBI वैधानिक दर्जा + कानूनी शक्तियां |
| संसदीय स्थायी समिति, 2007 (19वीं रिपोर्ट) | विश्वसनीयता के लिए अलग अधिनियम |
| संसदीय स्थायी समिति, 2008 (24वीं रिपोर्ट) | कानूनी जनादेश + अवसंरचना मजबूत करें |
| संसदीय समिति, 2015 | CVC + CBI भ्रष्टाचार-विरोधी विंग को लोकपाल के तहत एकीकृत करें |
आगे का रास्ता
CBI के लिए आगे का रास्ता
- स्वायत्तता के लिए व्यापक नया केंद्रीय कानून
- संस्थागत अखंडता और जनता का विश्वास बहाल करें
- अधिकारियों का अपना समर्पित कैडर
- अवसंरचना और HR मजबूत करें
- जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित करें
- RTI प्रयोज्यता पर सार्वजनिक बहस