भारतीय रंगमंच - मुख्य परीक्षा
भारतीय रंगमंच की परंपरा कम से कम 5000 वर्ष पुरानी है। विश्व में कहीं भी नाट्यशास्त्र पर सबसे पहली पुस्तक भारत में लिखी गई - भरत मुनि द्वारा नाट्य शास्त्र।
अवलोकन
भारतीय रंगमंच की प्रकृति
- एक कथात्मक रूप के रूप में शुरू हुआ जिसमें वाचन, गायन और नृत्य अभिन्न तत्व थे
- कथा पर जोर ने रंगमंच को शुरू से ही नाट्यात्मक बनाया
- सभी अन्य कलाओं को समाहित करता है: साहित्य, अभिनय, संगीत, नृत्य, गति, चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला
- सभी एक रूप में संयुक्त जिसे 'नाट्य' (रंगमंच) कहते हैं
संस्कृत रंगमंच (प्राचीन भारत)
अवलोकन
काल : 200 ई.पू. - 1000 ई.; गुप्त काल (4वीं-6वीं शताब्दी ई.) में शिखर
दो प्रमुख शैलियां:
- लोकधर्मी : दैनिक जीवन और मानव व्यवहार का यथार्थवादी चित्रण
- नाट्यधर्मी : शैलीबद्ध हाव-भाव और प्रतीकवाद; यथार्थवादी से अधिक कलात्मक
संस्कृत रंगमंच के प्रकार
- नाटक : महाकाव्यों से वीरतापूर्ण विषयों के साथ बड़े पैमाने के नाटक (उदा., शकुंतला)
- प्रकरण : काल्पनिक कहानियों पर आधारित सामाजिक नाटक (उदा., मृच्छकटिक)
- भाण : व्यंग्यात्मक तत्वों के साथ एकल-अभिनेता प्रदर्शन
- वीथि : संगीत और नृत्य के साथ लघु नाटक, अक्सर हास्यपूर्ण
- प्रहसन : समाज का मजाक उड़ाने वाले हास्य नाटक
संस्कृत रंगमंच की विशेषताएं
आधार:
- नाट्य शास्त्र (भरत मुनि) : अभिनय, हाव-भाव (मुद्राएं), भाव, रस को परिभाषित करने वाला मूलभूत ग्रंथ
प्रमुख तत्व:
- रसों का उपयोग : शृंगार (प्रेम), हास्य जैसी भावनाएं जगाना
- नृत्य और संगीत का एकीकरण : वाद्य: वीणा, बांसुरी, मृदंगम
- विस्तृत मंच कला : तीन खंडों वाले खुले रंगमंच
- कोई त्रासदी नहीं : ग्रीक नाटक के विपरीत; हमेशा सकारात्मक समापन
संरचना:
- पूर्व-नाटक अनुष्ठान : पर्दे के पीछे संगीत और नृत्य
- पूजा : अधिष्ठाता देवता की पूजा
- प्रस्तावना : मुख्य अभिनेत्री समय, स्थान, नाटककार का परिचय देती है
प्रसिद्ध संस्कृत नाटककार
| नाटककार | प्रमुख कृति | विशेषताएं |
|---|---|---|
| अश्वघोष | शारिपुत्रप्रकरण | हास्यपूर्ण; बौद्ध शिक्षाएं |
| भास | स्वप्नवासवदत्ता | रामायण, महाभारत से विषय |
| शूद्रक | मृच्छकटिक (मिट्टी की गाड़ी) | नायक, नायिका, खलनायक के बीच संघर्ष |
| कालिदास | शाकुंतलम, मालविकाग्निमित्र, विक्रमोर्वशी | सबसे महान नाटककार |
| भवभूति | उत्तररामचरित | अपने समय का सर्वश्रेष्ठ माना गया |
संस्कृत रंगमंच का पतन
- काव्य की ओर बदलाव : नाटककार कविता की ओर मुड़े
- कठोर रूढ़िवादिता : रचनात्मक प्रतिबंध
- धार्मिक सीमाएं : धार्मिक विषयों तक सीमित
- मुस्लिम आक्रमण : संस्कृत रंगमंच को हाशिए पर डाला
क्षेत्रीय लोक रंगमंच
मुख्य विशेषताएं
वर्गीकरण:
- अनुष्ठान रंगमंच : धार्मिक
- मनोरंजन रंगमंच : लौकिक
विशेषताएं:
- क्षेत्रीय भाषाएं और बोलियां
- आशुरचना और स्वतःस्फूर्तता
- सामाजिक और धार्मिक विषय
- मुखौटों और पोशाकों का उपयोग
- न्यूनतम मंच व्यवस्था (खुले स्थान, गांव के चौराहे, मंदिर प्रांगण)
उत्तर भारत लोक रंगमंच
| रंगमंच | क्षेत्र | विशेषताएं |
|---|---|---|
| भांड पथेर | कश्मीर | सुरनाई और ढोल के साथ नृत्य, संगीत, अभिनय; सूफी संत; लौकिक |
| सांग/स्वांग | राजस्थान, हरियाणा, UP, MP | रोहतक और हाथरस शैलियां; नौटंकी, तमाशा को प्रभावित किया |
| नौटंकी | UP | लयबद्ध कविता; महिला भागीदारी (गुलाब बाई) |
| रासलीला | UP | भगवान कृष्ण की पौराणिक कथाएं |
| माच | MP | संगीत रंगमंच; रंगत (मधुर धुनें) |
| रम्मन | उत्तराखंड | मुखौटा नृत्य; UNESCO मान्यता; चमोली जिला |
| रामलीला | UP | दशहरा के दौरान दस-दिवसीय तमाशा; राम की विजय |
| करियाला | HP | व्यंग्यात्मक; सामाजिक मुद्दे; दीवाली के दौरान प्रदर्शित |
पूर्वी भारत लोक रंगमंच
| रंगमंच | क्षेत्र | विशेषताएं |
|---|---|---|
| अंकिया नाट | असम | एक-अंकीय नाटक (भाओना); श्रीमंत शंकरदेव; संगीत, नृत्य |
| ओजा-पाली | असम | ओजा (मुख्य) और पालियां; कथाकथा परंपरा |
| जात्रा | बंगाल | मेलों में संगीतमय नाटक; धार्मिक/प्रेम कहानियां; चैतन्य प्रभाव |
| बिदेसिया | बिहार | प्रवास विषय; भिखारी ठाकुर; भोजपुरी लोक गीत |
| प्रह्लाद नाटक | ओडिशा | नरसिम्हा कथा; स्वर और वाद्य संगीत |
| सुअंग | ओडिशा | संगीतमय; हास्य तत्व |
दक्षिण भारत लोक रंगमंच
| रंगमंच | क्षेत्र | विशेषताएं |
|---|---|---|
| दशावतार | कोंकण, गोवा | विष्णु के दस अवतार; शैलीबद्ध श्रृंगार और मुखौटे |
| कृष्णाट्टम | केरल | आठ-दिवसीय प्रदर्शन; भगवान कृष्ण का जीवन |
| मुड़ियेट्टू | केरल | अनुष्ठानिक; काली मंदिर; भद्रकाली की विजय |
| थेय्यम | केरल | अनुष्ठानिक; रंगीन पोशाकें; आत्माओं और देवताओं का सम्मान |
| कूड़ियाट्टम | केरल | शास्त्रीय संस्कृत रंगमंच; UNESCO मान्यता; हस्त संकेत, नेत्र गतियां |
| यक्षगान | कर्नाटक | पौराणिक; विस्तृत पोशाक और संवाद |
| थेरुकूत्तू | TN | मंदिर उत्सवों के दौरान सड़क नाटक; द्रौपदी का जीवन |
| बुर्राकथा | AP, TN, कर्नाटक | मुख्य और सह-कलाकारों के साथ कथावाचन; हिंदू मिथक |
| वीथि नाटकम | AP | सड़क नाटक; खुले स्थानों में दिव्य कथाएं |
पश्चिम भारत लोक रंगमंच
| रंगमंच | क्षेत्र | विशेषताएं |
|---|---|---|
| भवाई | गुजरात | कच्छ और काठियावाड़; भक्तिपूर्ण और रोमांटिक; विविध वाद्य |
| तमाशा | महाराष्ट्र | नृत्य-केंद्रित; महिला अभिनेत्री केंद्रीय; शास्त्रीय नृत्य और संगीत |
रंगमंच का महत्व
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक मूल्य
- सामाजिक टिप्पणी : संस्कृत रंगमंच जाति का पालन करता था; लोक रंगमंच ने मानदंडों को चुनौती दी
- भक्ति आंदोलन प्रभाव : रासलीला, रामलीला ने वैष्णव धर्म का प्रसार किया
- सूफी और इस्लामी प्रभाव : किस्से, दास्तानगोई परंपराएं
- राजनीति और राजत्व : शासकों का महिमामंडन; धर्म को सुदृढ़ किया
- आर्थिक जीवन : व्यापारी वर्ग का चित्रण; आर्थिक विषमता
- हास्य और व्यंग्य : सामाजिक मानदंडों और शासन विफलताओं का मजाक उड़ाया
- सांस्कृतिक संरक्षण : मिथकों, अनुष्ठानों, मूल्यों का संरक्षण
- शिक्षा : नैतिक पाठ देता है; ऐतिहासिक ज्ञान
- कलात्मक संलयन : संगीत, नृत्य, नाटक संयुक्त
- क्षेत्रीय पहचान : स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का पोषण