बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म
पिछले वर्षों के प्रश्न
- बौद्ध धर्म के प्रसार में अशोक की भूमिका का आकलन करें। (2017)
विधर्मी धर्मों के उदय के कारण
विधर्मी धर्म क्यों उभरे
जटिल वैदिक अनुष्ठान → आम लोगों को भ्रमित करते थे क्षत्रिय बनाम ब्राह्मण संघर्ष → वर्णों के बीच श्रेष्ठता का विवाद पशु बलि → कृषि अर्थव्यवस्था के लिए समस्या; शूद्र असंतुष्ट उपनिषदीय दर्शन → अत्यधिक दार्शनिक, सभी को समझ नहीं आता था कठोर जाति व्यवस्था → बढ़ती कठोरता समाज को अशांत कर रही थी आर्थिक समृद्धि → वैश्य (व्यापारी) बेहतर सामाजिक स्थिति चाहते थे
बौद्ध धर्म
बुद्ध का जीवन
बुद्ध - जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
जन्म नाम → सिद्धार्थ गौतम कुल नाम → शाक्य (इसलिए शाक्यमुनि) जन्म स्थान → लुम्बिनी (नेपाल) पिता → शुद्धोधन (शाक्य प्रमुख) माता → महामाया (जन्म के 7 दिन बाद मृत्यु) सौतेली माता → महाप्रजापति गौतमी पत्नी → यशोधरा पुत्र → राहुल सारथी → चन्ना घोड़ा → कंथक
बुद्ध - जीवन की प्रमुख घटनाएं
चार महादृश्य → वृद्ध, रोगी, शव, तपस्वी (त्याग के लिए प्रेरित किया) महाभिनिष्क्रमण → महान त्याग (29 वर्ष की आयु में) भटकाव के वर्ष → 6 वर्ष तपस्या और खोज ज्ञानप्राप्ति (निर्वाण) → बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे (35 वर्ष की आयु) प्रथम उपदेश → सारनाथ (मृगदाव) में धर्मचक्र प्रवर्तन मृत्यु (महापरिनिर्वाण) → कुशीनगर, 80 वर्ष की आयु (483 ई.पू.) अंतिम भोजन → पावा में चुंद कम्मारपुत्त से सूकरमद्दव (नरम सूअर का मांस) अंतिम शिष्य → सुभद्द उत्तराधिकारी → बुद्ध ने संघ का नेतृत्व करने के लिए किसी उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं की
बुद्ध के जीवन में प्रतीक
| प्रतीक | घटना |
|---|---|
| हाथी | अवक्रांति (अवतरण/गर्भधारण) |
| कमल और बैल | जन्म |
| घोड़ा | महाभिनिष्क्रमण (त्याग) |
| बोधि वृक्ष | निर्वाण (ज्ञानप्राप्ति) |
| चक्र | धर्मचक्र प्रवर्तन (प्रथम उपदेश) |
| स्तूप | महापरिनिर्वाण (मृत्यु) |
| पदचिह्न | बुद्ध की उपस्थिति |
मूल शिक्षाएं
चार आर्य सत्य
दुक्ख → जीवन दुख से भरा है समुदय → दुख का कारण इच्छा है (तन्हा/तृष्णा) निरोध → दुख समाप्त किया जा सकता है मग्ग → दुख समाप्त करने का मार्ग (अष्टांगिक मार्ग)
अष्टांगिक मार्ग
सम्यक् दृष्टि → सम्मा दिट्ठि सम्यक् संकल्प → सम्मा संकप्प सम्यक् वाक् → सम्मा वाचा सम्यक् कर्मांत → सम्मा कम्मंत सम्यक् आजीव → सम्मा आजीव सम्यक् व्यायाम → सम्मा वायाम सम्यक् स्मृति → सम्मा सति सम्यक् समाधि → सम्मा समाधि
पंचशील (पांच उपदेश)
अहिंसा → हत्या न करना (जीवन के प्रति सम्मान) अस्तेय → चोरी न करना सत्य → झूठ न बोलना (असत्य से परहेज) ब्रह्मचर्य → यौन दुराचार न करना मद्य निषेध → मादक पदार्थों से परहेज
त्रिरत्न (तीन रत्न)
बुद्ध → संस्थापक धम्म → सिद्धांत/शिक्षा संघ → समुदाय (भिक्षु, भिक्षुणी और गृहस्थ अनुयायी)
बौद्ध साहित्य
त्रिपिटक (तीन टोकरियां)
सुत्त पिटक → नैतिकता पर बुद्ध की शिक्षाएं
- दीघ निकाय, मज्झिम निकाय, संयुत्त निकाय, अंगुत्तर निकाय, खुद्दक निकाय
विनय पिटक → मठ के नियम और विनियम
अभिधम्म पिटक → बौद्ध दर्शन
गैर-कैनोनिकल बौद्ध ग्रंथ
| ग्रंथ | विवरण |
|---|---|
| महावस्तु | संस्कृत-प्राकृत मिश्रित, बुद्ध की जीवनी |
| दीपवंश और महावंश | पालि में श्रीलंकाई ग्रंथ |
| विसुद्धिमग्ग | बुद्धघोष द्वारा |
| मिलिंदपन्हो | मिनांडर और नागसेन के बीच संवाद |
| ललितविस्तर | बुद्ध की जीवनी |
| बुद्धचरित | अश्वघोष द्वारा, संस्कृत में |
बौद्ध विद्वान
महत्वपूर्ण बौद्ध विद्वान एवं कृतियां
| विद्वान | योगदान |
|---|---|
| महाकश्यप | प्रथम बौद्ध परिषद के अध्यक्ष |
| सब्बकामी | द्वितीय बौद्ध परिषद के अध्यक्ष |
| मोग्गलिपुत्त तिस्स | तृतीय बौद्ध परिषद के अध्यक्ष; अशोक के गुरु |
| वसुमित्र | चतुर्थ बौद्ध परिषद के अध्यक्ष; महाविभाषा शास्त्र |
| नागार्जुन | माध्यमिक शून्यवाद; "भारतीय आइंस्टीन" कहलाते हैं |
| धर्मकीर्ति | "भारत के कांट" कहलाते हैं |
| असंग | योगाचार्य/विज्ञानवाद विद्यालय |
| वसुबंधु | अभिधर्मकोश |
| अश्वघोष | बुद्धचरित |
| बुद्धघोष | विसुद्धिमग्ग |
| दिन्नाग | बौद्ध तर्कशास्त्र के संस्थापक |
बौद्ध परिषदें
बौद्ध परिषदें
प्रथम परिषद → 483 ई.पू., सप्तकर्णी गुफा, राजगृह
- अध्यक्ष: महाकश्यप; संरक्षक: अजातशत्रु
- सुत्तपिटक (आनंद द्वारा) और विनयपिटक (उपालि द्वारा) का संकलन
द्वितीय परिषद → 383 ई.पू., वैशाली
- अध्यक्ष: सब्बकामी; संरक्षक: कालाशोक
- प्रथम विभाजन: स्थविरवादी और महासांघिक
तृतीय परिषद → 250 ई.पू., पाटलिपुत्र
- अध्यक्ष: मोग्गलिपुत्त तिस्स; संरक्षक: अशोक
- अभिधम्मपिटक का संकलन; धर्मदूत भेजे गए
चतुर्थ परिषद → प्रथम शताब्दी ई., कुंडलवन (कश्मीर)
- अध्यक्ष: वसुमित्र; उपाध्यक्ष: अश्वघोष; संरक्षक: कनिष्क
- विभाजन: हीनयान और महायान; महाविभाषा शास्त्र का संकलन
बौद्ध धर्म के संप्रदाय
प्रारंभिक विभाजन (द्वितीय परिषद के बाद)
स्थविरवादी (थेरवाद) → बुद्ध मानव हैं; वृद्धों का विद्यालय महासांघिक → बुद्ध की मानवाकार रूप में पूजा
हीनयान बनाम महायान बनाम वज्रयान
| आयाम | हीनयान/थेरवाद | महायान | वज्रयान |
|---|---|---|---|
| अर्थ | लघु यान | महान यान | हीरा यान (तांत्रिक) |
| बुद्ध | महान मानव | देवता | देवता |
| मुक्ति | आत्म-अनुशासन और ध्यान | बुद्ध और बोधिसत्त्वों की सहायता | जादुई शक्तियां |
| मूर्ति पूजा | नहीं | हां (प्रथम मानव प्रतिमाएं) | हां |
| भाषा | पालि | संस्कृत | संध्या भाषा |
| केंद्रीय अवधारणा | अर्हत | बोधिसत्त्व | तारा |
| विकास क्षेत्र | श्रीलंका, दक्षिण एशिया | मध्य और पूर्व एशिया | तिब्बत |
महत्वपूर्ण बोधिसत्त्व
मैत्रेय → भविष्य के बुद्ध; लाफिंग बुद्धा इनका अवतार है पद्मपाणि/अवलोकितेश्वर → करुणा वज्रपाणि → प्रकट शक्ति मंजुश्री → प्रकट ज्ञान
बौद्ध शब्द एवं स्थल
महत्वपूर्ण बौद्ध शब्द
निर्वाण → इच्छा की ज्वाला का विलोपन; परम आनंद की अवस्था उपसंपदा → भिक्षु के रूप में समुदाय में प्रवेश का दीक्षा संस्कार वस्स → वर्षा ऋतु में 3 महीने का वार्षिक प्रवास तथागत → "जिसका सत्य ज्ञान है" (बुद्ध की उपाधि)
महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल
राजगीर (पंचपहाड़ी):
- सप्तपर्णी गुफा → प्रथम बौद्ध परिषद का स्थान
- गृद्धकूट पहाड़ी → जहां बुद्ध ने सद्धर्मपुंडरीक सूत्र का उपदेश दिया
नालंदा विश्वविद्यालय:
- कुमारगुप्त प्रथम द्वारा स्थापित
- बालपुत्रदेव (इंडोनेशिया) ने यहां मठ की स्थापना की
सांची स्तूप:
- प्राचीन नाम: काकनम, काकनाय, बोतश्रीपर्वत
- बुद्ध के जीवन की घटनाओं से कोई सीधा संबंध नहीं
प्रसार एवं पतन के कारण
प्रसार के कारण:
- उदार और लोकतांत्रिक
- सरल भाषा (पालि)
- बुद्ध का व्यक्तित्व
- राजकीय संरक्षण
- सस्ती प्रथाएं
पतन के कारण:
- बौद्धों में विभाजन
- संस्कृत का उपयोग (आम लोग अलग हुए)
- बुद्ध की मूर्ति पूजा (मूल सादगी खो गई)
- संघ में भ्रष्टाचार
- इस्लामी आक्रमण
जैन धर्म
उत्पत्ति एवं तीर्थंकर
जैन धर्म - उत्पत्ति
कुल तीर्थंकर → 24 प्रथम तीर्थंकर → ऋषभदेव (ऋग्वेद में उल्लेखित) 23वें तीर्थंकर → पार्श्वनाथ (वाराणसी में जन्म) 24वें तीर्थंकर → वर्धमान महावीर (अंतिम) टिप्पणी → सभी तीर्थंकर जन्म से क्षत्रिय थे ऋषभदेव और अरिष्टनेमि → ऋग्वेद में उल्लेखित
वर्धमान महावीर (540-468 ई.पू.)
माता → त्रिशला (लिच्छवि प्रमुख चेतक की बहन) पिता → सिद्धार्थ स्थान → लिच्छवि (वज्जि संघ) उपाधियां → नायपुत्त, मुनि, समण, निगंठ पत्नी → यशोदा पुत्री → अनोज्जा (प्रियदर्शना) केवलज्ञान → रिजुपालिका नदी तट पर साल वृक्ष के नीचे 42 वर्ष की आयु में प्राप्त प्रयुक्त भाषा → प्राकृत (अर्ध-मागधी) मृत्यु → पावापुरी; सिद्ध बने प्रथम संघ प्रमुख → सुधर्मन (महावीर के बाद)
जैन दर्शन
मूल जैन मान्यताएं
जिन का अर्थ → विजेता अहिंसा → चरम अर्थ में पालन (कृषि की अनुमति नहीं) आत्मा → सब कुछ में आत्मा है (चट्टानों में भी) कर्म → आत्मा का अभिशाप; पुनर्जन्म निर्धारित करता है ईश्वर अवधारणा → पूर्ण सत्ता, सृष्टिकर्ता ईश्वर नहीं वर्ण में पुनर्जन्म → पिछले कर्म पर आधारित मोक्ष → केवल संसार त्याग से; मठ अस्तित्व आवश्यक संथारा/समलेखना → मृत्यु तक उपवास
जैन धर्म के त्रिरत्न (तीन रत्न)
सम्यक् ज्ञानसम्यक् दर्शनसम्यक् चरित्र
महाव्रत (पांच महान प्रतिज्ञाएं)
अहिंसा → अहिंसा सत्य → सत्य अस्तेय → चोरी न करना अपरिग्रह → अपरिग्रह (पार्श्वनाथ द्वारा जोड़ा गया) ब्रह्मचर्य → ब्रह्मचर्य (महावीर द्वारा जोड़ा गया) टिप्पणी → पार्श्वनाथ ने 4 व्रत दिए; महावीर ने 5वां (ब्रह्मचर्य) जोड़ा
सात तत्व
| तत्व | अर्थ |
|---|---|
| जीव | जीवित पदार्थ (आत्मा) |
| अजीव | निर्जीव पदार्थ (द्रव्य) |
| आस्रव | कर्म द्रव्य का आत्मा में प्रवाह |
| बंधन | कर्म द्रव्य द्वारा आत्मा का बंधन |
| संवर | आस्रव को रोकना |
| निर्जरा → कर्म द्रव्य को धीरे-धीरे हटाना | |
| मोक्ष | मुक्ति की प्राप्ति |
अन्य जैन दर्शन
अनेकांतवाद (तत्वमीमांसा) → वास्तविकता का सिद्धांत; वास्तविकता की बहु-पक्षीयता
स्यादवाद (ज्ञानमीमांसा) → ज्ञान का सिद्धांत; सभी निर्णय सशर्त हैं; 7 तार्किक निर्णय (सप्तभंगी)
जैन परिषदें एवं संप्रदाय
जैन परिषदें
प्रथम परिषद → 300 ई.पू., पाटलिपुत्र (बिहार)
- अध्यक्ष: स्थूलभद्र
- अंगों का संकलन (खो गए)
द्वितीय परिषद → 512 ई., वल्लभी (गुजरात)
- अध्यक्ष: देवर्धि क्षमाश्रमण
- 12 अंगों और उपांगों का संकलन
दिगंबर बनाम श्वेतांबर विभाजन
विभाजन का कारण → मगध में 12 वर्षीय अकाल; भद्रबाहु का समूह दक्षिण गया (कठोर); स्थूलभद्र का समूह रुका (उदार)
| आयाम | दिगंबर | श्वेतांबर |
|---|---|---|
| नेतृत्व | भद्रबाहु | स्थूलभद्र |
| अर्थ | आकाश वस्त्र | श्वेत वस्त्र |
| वस्त्र | नग्नता (पुरुष) | सफेद वस्त्र |
| महिला मोक्ष | नहीं (पुरुष रूप में पुनर्जन्म आवश्यक) | हां |
| व्रत | सभी 5 | 4 (ब्रह्मचर्य को छोड़कर) |
तीर्थंकर एवं प्रतीक
प्रतीकों सहित प्रमुख तीर्थंकर
| तीर्थंकर | प्रतीक | निर्वाण स्थल |
|---|---|---|
| ऋषभदेव | बैल | अष्टापद पर्वत |
| पार्श्वनाथ | सर्प | सम्मेदशिखर |
| महावीर | सिंह | पावापुरी |
| नेमिनाथ | शंख | रैवतगिरी |
| वासुपूज्य | भैंसा | चंपा नगरी |
जैन साहित्य एवं संरक्षण
महत्वपूर्ण जैन ग्रंथ
दिगंबर ग्रंथ:
- कल्पसूत्र (भद्रबाहु)
- परिशिष्टपर्वन (हेमचंद्र)
- तत्त्वार्थ सूत्र (उमास्वामी)
श्वेतांबर आगम:
- 12 अंग, 12 उपांग, 10 प्रकीर्णक
- 6 छेदसूत्र, 4 मूलसूत्र
- भाषा: अर्ध-मागधी प्राकृत
जैन धर्म के राजकीय संरक्षक
दक्षिण भारत: कदंब वंश, गंग वंश, अमोघवर्ष, कुमारपाल (चालुक्य) उत्तर भारत: बिम्बिसार, अजातशत्रु, चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार, खारवेल संप्रति (अशोक के पोते) → जैन साहित्य में संरक्षक के रूप में वर्णित
तुलना: बौद्ध धर्म बनाम जैन धर्म
बौद्ध धर्म बनाम जैन धर्म तुलना
| आयाम | बौद्ध धर्म | जैन धर्म |
|---|---|---|
| ईश्वर | मौन | पूर्ण सत्ता, सृष्टिकर्ता नहीं |
| कर्म सिद्धांत | हां | हां (कर्म आत्मा का अभिशाप है) |
| पुनर्जन्म | हां | हां |
| वेद का अधिकार | नहीं (अस्वीकृत) | नहीं (अस्वीकृत) |
| वर्ण आलोचना | हां | नहीं (कर्म पर आधारित जन्म) |
| अतिवाद | नहीं (मध्यम मार्ग) | हां (चरम तपस्या) |
| आत्मा | नहीं (अनात्मन) | हां (सब कुछ में आत्मा) |
| अहिंसा | हां | हां (चरम रूप) |
छह आस्तिक दर्शन
सांख्य
संस्थापक → कपिल स्थिति → प्राचीनतम दर्शन प्रकृति → द्वैतवादी: पुरुष (आत्मा) + प्रकृति (प्रकृति) ईश्वर → स्वीकार नहीं मुक्ति → आत्म-ज्ञान से मुक्ति
योग
संस्थापक → पतंजलि लक्ष्य → अनुशासन के माध्यम से प्रकृति से पुरुष को मुक्त करना ईश्वर → प्रारंभिक स्तर पर स्वीकृत अष्टांग (आठ अंग): यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि
न्याय
संस्थापक → गौतम दृष्टिकोण → तार्किक तर्क के माध्यम से ज्ञान (वैज्ञानिक दृष्टिकोण) ईश्वर → स्वीकृत
वैशेषिक
संस्थापक → कणाद सिद्धांत → परमाणु सिद्धांत; सब कुछ परमाणुओं का संयोजन है ईश्वर → स्वीकृत
पूर्व मीमांसा
वेद → शाश्वत ईश्वर → ईश्वर में विश्वास नहीं मुक्ति → कर्मकांड के माध्यम से
उत्तर मीमांसा (वेदांत)
प्रमुख दृष्टिकोण:
| दार्शनिक | विद्यालय | मुक्ति |
|---|---|---|
| शंकराचार्य | अद्वैत (अद्वैतवाद) | ज्ञान |
| रामानुज | विशिष्टाद्वैत | भक्ति |
| माधवाचार्य | द्वैत (द्वैतवाद) | भक्ति |
| निम्बार्काचार्य | द्वैताद्वैत | भक्ति |
| वल्लभाचार्य | शुद्धाद्वैत | भक्ति |
नास्तिक दर्शन
आजीविक
संस्थापक → मक्खलि गोसाल (महावीर के शिष्य) मान्यताएं:
- तपस्या के लिए नग्नता
- नियतिवाद (पूर्वनिर्धारणवाद) - कर्म में विश्वास नहीं
चार्वाक (लोकायत)
प्रकृति → शुद्ध भौतिकवादी दर्शन मान्यताएं:
- आत्मा, ईश्वर, कर्म में विश्वास नहीं
- अजित केशकंबली द्वारा लोकप्रिय
- देहात्मवाद का सिद्धांत
UPSC प्रारंभिक पैटर्न
हालिया परीक्षा फोकस क्षेत्र
| विषय | हालिया प्रश्न पैटर्न | UPSC वर्ष |
|---|---|---|
| बौद्ध परिषदें | स्थान, अध्यक्ष, संरक्षक, परिणाम | मूल विषय |
| हीनयान बनाम महायान | बुद्ध पूजा, भाषा, मुक्ति में अंतर | 2021 |
| जैन तीर्थंकर | प्रतीक, विशेषकर ऋषभदेव और महावीर | बारंबार |
| दिगंबर बनाम श्वेतांबर | महिला मोक्ष, वस्त्र के बारे में मान्यताएं | 2019 |
| बौद्ध स्थल | सांची, सारनाथ, बोधगया संबंध | मूल विषय |
आम जाल:
- ❌ बुद्ध ने किसी उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं की
- ❌ जैन धर्म महावीर से पहले है (वे 24वें तीर्थंकर थे)
- ✅ पार्श्वनाथ ने 4 व्रत दिए; महावीर ने ब्रह्मचर्य (5वां) जोड़ा
- ✅ बौद्ध धर्म के त्रिरत्न ≠ जैन धर्म के त्रिरत्न
- ✅ स्थूलभद्र = श्वेतांबर; भद्रबाहु = दिगंबर