वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद)
अवलोकन
'वामपंथी उग्रवाद (LWE)' की पृष्ठभूमि और अर्थ
- अर्थ: वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) मुख्य रूप से एक पूंजीवाद विरोधी विचारधारा है जो उन राजनीतिक व्यवस्थाओं के परिवर्तन का आह्वान करती है जो सामाजिक असमानता के लिए जिम्मेदार हैं। यह अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सशस्त्र हिंसक विद्रोह का सहारा लेता है।
- विचारधारा: यह चीनी नेता माओ-त्से तुंग के राजनीतिक सिद्धांतों ('माओवाद') से प्रेरित है, जिसमें 'सत्ता बंदूक की नली से निकलती है' का नारा प्रमुख है।
- रेड कॉरिडोर (Red Corridor): यह मुख्य रूप से भारत के मध्य और पूर्वी हिस्सों (छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार आदि) के आदिवासी क्षेत्रों में केंद्रित है।
वर्तमान स्थिति (Data & Statistics):
- हिंसा में गिरावट: 2009 की तुलना में 2021 तक LWE संबंधित हिंसा की घटनाओं में 77% की कमी आई है।
- मृत्यु दर: इसी अवधि के दौरान सुरक्षा बलों और नागरिकों की मौतों में 85% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- भौगोलिक संकुचन: 'रेड कॉरिडोर' का भौगोलिक विस्तार 126 जिलों (2010) से घटकर अब केवल 45-50 जिलों तक सीमित रह गया है, जिनमें से अधिकतर बस्तर और आसपास के इलाके हैं।
पिछले वर्ष के प्रश्न (PYQs)
| वर्ष | प्रश्न |
|---|---|
| 2022 | नक्सलवाद एक सामाजिक, आर्थिक और विकासात्मक मुद्दा है जो हिंसक आंतरिक सुरक्षा खतरे के रूप में प्रकट होता है। इसके उभरते मुद्दों और मुकाबले की रणनीति पर चर्चा करें। |
| 2020 | पूर्वी भारत में LWE के निर्धारक क्या हैं? सरकार और सुरक्षा बलों की रणनीति क्या होनी चाहिए? |
| 2018 | LWE में गिरावट के बावजूद यह अभी भी चुनौती है। सरकार के जवाबी दृष्टिकोण को समझाइए। |
विकास और उग्रवाद के बीच संबंध (अध्याय 2)
विकास और चरमपंथ का अंतर्संबंध (Link between Development & Extremism)
- मूल कारण (Core Cause): विकास की कमी (गरीबी, बेरोजगारी, क्षेत्रीय विषमता) ही चरमपंथ के पनपने का मुख्य कारण है। यह उन क्षेत्रों में अधिक प्रबल है जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
- दुष्चक्र (Vicious Cycle):
- उग्रवाद विकास कार्यों (सड़क, अस्पताल, स्कूल) को जानबूझकर बाधित करता है ताकि वे अपनी पैठ बनाए रख सकें।
- विकास के अभाव में क्षेत्र और अधिक पिछड़ जाता है, जिससे स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ता है।
- यह असंतोष उग्रवाद के लिए उपजाऊ जमीन और 'भर्ती आधार' (Recruitment Base) तैयार करता है।
- रणनीति: माओवादी 'मोबाइल (गतिशील) युद्ध' (Mobile Warfare) की नीति अपनाते हैं और दुर्गम पहाड़ी व वन क्षेत्रों में 'बेस एरिया' स्थापित करते हैं जहाँ प्रशासन की पहुँच कम हो।
- नक्सली उद्देश्य: इनका अंतिम लक्ष्य हिंसक क्रांति के माध्यम से राज्य की सत्ता को उखाड़ फेंकना और अपनी व्यवस्था स्थापित करना है।
वामपंथी उग्रवाद के प्रसार के कारण (Detailed Causes)
वामपंथी उग्रवाद के प्रसार के पीछे सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारकों का एक जटिल जाल है:
भूमि संबंधी मुद्दे (Land Related Issues):
- भूमि सुधारों की विफलता: चकबंदी कानूनों का सही से लागू न होना और बड़े भूस्वामियों का दबदबा।
- असुरक्षित पट्टेदारी: बटाईदारों और छोटे किसानों के पास भूमि के स्वामित्व के दस्तावेज़ों का अभाव।
- अपर्याप्त मुआवजा: सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे में धांधली और देरी।
वन संबंधी और जनजातीय मुद्दे (Forest & Tribal Issues):
- पारंपरिक अधिकारों का हनन: 'जल-जंगल-ज़मीन' पर आदिवासियों के पारम्परिक दावों की अनदेखी।
- वन कानूनों का प्रभाव: वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के कड़े प्रावधानों के कारण आदिवासियों का अपनी ही भूमि से बेदखल होना।
- लघु वनोपज (MFP): तेंदू पत्ता जैसे उत्पादों के संग्रह और व्यापार पर सरकारी नियंत्रण और शोषण।
आर्थिक और विकासात्मक कारक:
- बुनियादी ढांचे की कमी: प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, बिजली, दूरसंचार और बैंकिंग सुविधाओं का अभाव।
- बेरोजगारी: शिक्षा और कौशल के अभाव में युवाओं के पास रोजगार के सीमित अवसर, जिससे वे आसानी से नक्सलियों के बहकावे में आ जाते हैं।
- औद्योगीकरण का विस्थापन: खनन और बड़े उद्योगों के कारण बड़े पैमाने पर आदिवासियों का विस्थापन और उनका सही पुनर्वास न होना।
शासन और प्रशासन की विफलता:
- प्रशासनिक शून्यता: दूरदराज के इलाकों में पुलिस स्टेशन, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों का न होना, जिसे नक्सली अपनी 'समानांतर सरकार' (जन अदालत) से भरते हैं।
- भ्रष्टाचार: कल्याणकारी योजनाओं के धन का निचले स्तर पर बंदरबांट।
- PESA और FRA का खराब क्रियान्वयन: पंचायतों के विस्तार (PESA) अधिनियम 1996 और वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 का जमीनी स्तर पर प्रभावी न होना।
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारक:
- मानवाधिकार उल्लंघन: पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा कथित उत्पीड़न और फर्जी मुठभेड़ों के आरोप, जिससे स्थानीय जनता में अविश्वास पैदा होता है।
- जनजातीय संस्कृति की उपेक्षा: आदिवासियों की विशिष्ट पहचान और गौरव के प्रति मुख्यधारा के समाज की उदासीनता।
सरकारी प्रतिक्रिया और रणनीतियां
सरकार की रणनीति: 'SAMADHAN' पहल (2017)
गृह मंत्रालय द्वारा 2017 में "समाधान" (SAMADHAN) रणनीति पेश की गई, जो LWE से निपटने के लिए एक व्यापक और बहुआयामी दृष्टिकोण है:
- S - Smart Leadership (कुशल नेतृत्व): सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना।
- A - Aggressive Strategy (आक्रामक रणनीति): माओवादियों के 'बेस एरिया' में घुसकर उन्हें निर्णायक रूप से हराना।
- M - Motivation and Training (प्रोत्साहन और प्रशिक्षण): सुरक्षा बलों को जंगल युद्ध और आधुनिक हथियारों में विशेष प्रशिक्षण देना।
- A - Actionable Intelligence (सटीक खुफिया जानकारी): रीयल-टाइम डेटा और स्थानीय मुखबिरों के नेटवर्क का कुशलतापूर्वक उपयोग।
- D - Dashboard based KPIs (डैशबोर्ड आधारित प्रदर्शन संकेतक): विकास और सुरक्षा संबंधी लक्ष्यों की निरंतर निगरानी।
- H - Harnessing Technology (तकनीक का उपयोग): ड्रोन (Drones), UAVs, नाइट विजन उपकरण और रडार का उपयोग।
- A - Action Plan for Each Theatre (प्रत्येक क्षेत्र के लिए कार्य योजना): अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों के अनुसार रणनीति तैयार करना।
- N - No Access to Financing (वित्तपोषण के स्रोतों को रोकना): नक्सलियों के जबरन वसूली (Levy) नेटवर्क और अवैध व्यापार को नष्ट करना।
विशिष्ट उग्रवाद-विरोधी बल (Specialized Anti-LWE Forces)
विभिन्न राज्यों और केंद्र ने नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए विशेष बलों का गठन किया है:
- ग्रेहाउंड्स (Greyhounds): आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का यह बल दुनिया के सबसे प्रभावी जंगल युद्ध बलों में से एक माना जाता है। इसकी सफलता 'स्थानीय खुफिया' और 'छोटे दल' की रणनीति में निहित है।
- कोबरा (CoBRA - CRPF): 'कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन' (Commando Battalion for Resolute Action) वन क्षेत्रों में छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) के लिए प्रशिक्षित CRPF की एक विशेष शाखा है।
- बस्तरिया बटालियन (CRPF): छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के स्थानीय जनजातीय युवाओं को सुरक्षा बलों में शामिल करने की पहल, जिससे स्थानीय भाषा और भूगोल की समझ का लाभ मिलता है।
- स्पेशल टास्क फोर्स (STF): बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में राज्य पुलिस के भीतर विशेष रूप से प्रशिक्षित इकाइयां।
- ब्लैक पैंथर (Black Panther): छत्तीसगढ़ पुलिस की तर्ज पर ग्रेहाउंड्स जैसी विशेष इकाई का गठन।
प्रमुख सरकारी योजनाएं और विकासात्मक पहलें
- 'रोशनी': अति-उग्रवाद प्रभावित जिलों के जनजातीय युवाओं के लिए विशेष कौशल विकास योजना।
- सड़क संपर्क परियोजना (RRP-I, II): दुर्गम क्षेत्रों में 5000 किमी से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण।
- मोबाइल टावर परियोजना: नेटवर्क कनेक्टिविटी में सुधार के लिए बस्तर जैसे प्रभावित क्षेत्रों में टावरों की स्थापना।
- आकांक्षी जिला कार्यक्रम: 35 चरम प्रभावित जिलों में विकास के मानकों और बुनियादी ढांचे के कायाकल्प पर ध्यान।
- बस्तरिया बटालियन: CRPF में बस्तर के स्थानीय युवाओं की भर्ती, जिससे स्थानीय खुफिया जानकारी और विश्वास बढ़ता है।
समकालीन चुनौतियां और पहलें
नगरीय नक्सलवाद (Urban Naxalism)
- अवधारणा: यह भाकपा (माओवादी) के 'शहरी परिप्रेक्ष्य' (Urban Perspective) दस्तावेज़ पर आधारित है, जिसका उद्देश्य शहरों में वैचारिक आधार तैयार करना है।
- भूमिका: शहरों में बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और छात्रों का उपयोग करके नक्सलियों को कानूनी सहायता, रसद और वैचारिक आधार प्रदान करना।
- खतरा: इसे भारत का "अदृश्य दुश्मन" माना जाता है जो लोकतांत्रिक संस्थानों के भीतर से लोकतांत्रिक ढांचे को अस्थिर करने का प्रयास करता है।
केस स्टडीज (Success Stories & Case Studies)
1. सारांडा मॉडल (Saranda Model - झारखंड):
- समस्या: झारखंड का सारांडा वन क्षेत्र कभी नक्सलियों का "मुख्यालय" था, जहाँ कोई भी जाना जोखिम भरा था।
- समाधान (2011): सरकार ने 'सारांडा विकास योजना' शुरू की। सुरक्षा बलों द्वारा क्षेत्र को मुक्त कराने के बाद, वहां सड़कों, बैंकों, स्कूलों और जन वितरण प्रणाली (PDS) का सघन जाल बिछाया गया।
- परिणाम: विकास की पहुँच ने नक्सलियों के पैर उखाड़ दिए और स्थानीय लोगों का सरकार पर विश्वास बहाल हुआ।
2. Think-B (बस्तर, छत्तीसगढ़):
- समाधान: प्रशासन द्वारा "बस्तर-आधारित स्टार्ट-अप इनक्यूबेटर" (Think-B) की स्थापना।
- लक्ष्य: आदिवासी युवाओं को बंदूक थामने के बजाय उद्यमिता और रोजगार की ओर प्रेरित करना।
- परिणाम: स्थानीय युवाओं द्वारा 15+ सफल स्टार्ट-अप शुरू किए गए, जिससे यह साबित हुआ कि विकास और नवाचार उग्रवाद का सबसे प्रभावी उत्तर है।
आगे की राह (Way Forward)
- सहकारी संघवाद: केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय (जैसे 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट')।
- अधिकारों की सुरक्षा: वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 का पूर्ण और पारदर्शी कार्यान्वयन।
- फंडिंग पर प्रहार: नक्सलियों के जबरन वसूली और लेवी नेटवर्क को तकनीकी निगरानी से नष्ट करना।
- विश्वास बहाली: विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से "दिल और दिमाग" जीतने (Winning Hearts and Minds) पर जोर।