आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा
बाहरी राज्य और गैर-राज्य कर्ता
बाहरी राज्य कर्ता - परिभाषा और भूमिका
बाहरी राज्य कर्ता : विदेशी सरकारें/एजेंसियां (सैन्य, खुफिया) जो गुप्त रूप से दूसरे देश की आंतरिक सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाइयों का समर्थन करती हैं
प्रमुख खतरे:
- पारंपरिक सैन्य खतरे : चीन (LAC) और पाकिस्तान (LoC) से दो-मोर्चा चुनौती; संयुक्त अभ्यास और हथियार सहायता
- आर्थिक जबरदस्ती : चीन का BRI रणनीतिक बंदरगाहों (ग्वादर, हंबनटोटा) के माध्यम से भारत को घेरता है
- शरणार्थियों का हथियारीकरण : बांग्लादेश-प्रभावित जनसांख्यिकीय बदलाव असम, पश्चिम बंगाल में
- राज्य-प्रायोजित आतंकवाद : पाकिस्तान का ISI LeT, JeM का समर्थन; उदा: 2025 पहलगाम हमला (26 नागरिक मृत्यु)
- साइबर युद्ध : रक्षा, पावर ग्रिड में घुसपैठ; उदा: Luckycat, ShadowPad अभियान
- हाइब्रिड युद्ध : ड्रोन + साइबर आक्रामक; उदा: 2025 ऑपरेशन सिंदूर
- जासूसी : Luckycat ने भारतीय सैन्य अनुसंधान संस्थानों को निशाना बनाया
- उग्रवाद का समर्थन : पाकिस्तान कश्मीर अलगाववाद का समर्थन; NE उग्रवादियों को चीन का पिछला समर्थन
- मनोवैज्ञानिक युद्ध : सोशल मीडिया के माध्यम से फेक न्यूज, सांप्रदायिक अशांति
देश-वार चुनौतियां
1. पाकिस्तान
- सीमापार आतंकवाद, कट्टरपंथीकरण, संघर्ष विराम उल्लंघन, FICN परिसंचरण
- डेटा: पाकिस्तान कश्मीर में उग्रवाद का समर्थन करने के लिए ~$5 मिलियन वार्षिक खर्च करता है
- उदाहरण: पुलवामा (2019) - 40 CRPF शहीद; 26/11 (2008) - 166 मारे गए; पहलगाम (2025) - 26 नागरिक मारे गए
- ISI LeT, JeM को वित्तपोषण, प्रशिक्षण और सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है
2. चीन
- सीमा घुसपैठ, साइबर जासूसी, स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स, जल युद्ध
- डेटा: APT41 (चीनी राज्य-प्रायोजित समूह) ने एयर इंडिया (2021) सहित भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया
- उदाहरण: गलवान झड़प (2020) - 20 भारतीय सैनिक शहीद; यांग्त्से झड़प (2022)
- 1960-70 के दशक में नागा उग्रवादियों को अतीत में समर्थन
3. बांग्लादेश
- अवैध प्रवास, रोहिंग्या प्रवाह, तस्करी
- डेटा: जनसांख्यिकीय चिंताओं के कारण 2025 की शुरुआत में 330+ बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजा गया
- उदाहरण: WB और असम में पशु तस्करी; 40,000 से अधिक रोहिंग्या मुसलमान भारत में प्रवेश कर गए
- घुसपैठ के लिए छिद्रपूर्ण भारत-बांग्लादेश सीमा का शोषण
4. नेपाल
- खुली सीमा तस्करी, भारत-विरोधी भावनाएं, चीनी प्रभाव
- डेटा: नेपाल गलियारे के माध्यम से FICN तस्करी; कालापानी सीमा विवाद
- FICN और आतंक लॉजिस्टिक्स के लिए खुली 1,850 किमी सीमा का उपयोग
5. म्यांमार
- NE उग्रवादियों के लिए सुरक्षित आश्रय, हथियार तस्करी, शरणार्थी आवाजाही
- डेटा: भारत ने ULFA के म्यांमार मुख्यालय पर ड्रोन हमला किया (2025)
- उदाहरण: सीमा पार NSCN(K) शिविर; चिन राज्य शरणार्थी
- घुसपैठ रोकने के लिए मुक्त आवाजाही व्यवस्था 2024 में समाप्त
6. श्रीलंका
- चीनी रणनीतिक उपस्थिति, नौसैनिक चुनौतियां
- उदाहरण: 99 वर्ष की चीनी लीज पर हंबनटोटा बंदरगाह
- हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा चिंताएं
7. अफगानिस्तान
- आतंक प्रजनन स्थल, तालिबान पुनरुत्थान
- पाकिस्तान के माध्यम से हथियार और मादक पदार्थ प्रवाह
- अल-कायदा और ISIS-K पुनर्समूहन का खतरा
गैर-राज्य कर्ता - प्रकार और खतरे
1. आतंकवादी संगठन
- बड़े पैमाने पर हताहत, सीमापार घुसपैठ, कट्टरपंथीकरण
- उदाहरण: 26/11 मुंबई (LeT) - 166 मारे गए; पुलवामा (JeM) - 40 CRPF; पहलगाम (2025) - 26 नागरिक
- केरल, हैदराबाद में ISIS मॉड्यूल का पता चला
2. संगठित अपराध सिंडिकेट
- आतंक-वित्तपोषण, हथियार/ड्रग तस्करी, FICN परिसंचरण
- उदाहरण: 1993 मुंबई ब्लास्ट में डी-कंपनी शामिल, आतंक का वित्तपोषण जारी
- डेटा: RBI की 2024-25 रिपोर्ट जाली ₹500 नोटों में 37% वृद्धि दर्शाती है
3. ड्रग तस्कर (नार्को-आतंकवाद)
- मादक पदार्थ आतंकवाद का वित्तपोषण करते हैं; मादक द्रव्यों का सेवन सीमा क्षेत्रों को अस्थिर करता है
- डेटा: "उड़ता राजस्थान" घटना - 2024-25 के मध्य तक, राजस्थान पाकिस्तान से भारत का मुख्य ड्रग प्रवेश बिंदु बन गया
- उदाहरण: गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान); गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड)
- BSF ने 2025 में पंजाब सीमा पर 100 पाकिस्तानी ड्रोन बरामद किए (2024 में 294) जो हेरोइन तस्करी से जुड़े थे
4. मानव तस्कर
- शोषण, जबरन श्रम, सीमापार तस्करी नेटवर्क
- डेटा: BSF की मानव तस्करी विरोधी इकाइयों ने 2021 में दक्षिण बंगाल फ्रंटियर से 33 महिलाओं को बचाया
- उदाहरण: पश्चिम बंगाल, झारखंड तस्करी मार्ग
5. वामपंथी उग्रवादी (माओवादी)
- गुरिल्ला हमले, IED घात, बुनियादी ढांचे का विनाश
- डेटा: करेगुट्टलु पहाड़ियों पर ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में 31 माओवादी मारे गए (2025)
- उदाहरण: दंतेवाड़ा (2023), गढ़चिरौली (2019)
6. NE उग्रवादी समूह
- जातीय उग्रवाद, अलगाववाद, सीमापार शरण
- डेटा: मणिपुर में मैतेई-कुकी संघर्ष के दौरान 6,000+ हथियार लूटे गए (2023)
- उदाहरण: NSCN(IM), ULFA, PLA, UNLF
7. साइबर अपराधी
- डेटा उल्लंघन, वित्तीय धोखाधड़ी, जासूसी
- डेटा: भारत ने 2024 में 20.41 लाख साइबर अपराध घटनाएं दर्ज कीं (CERT-In)
- उदाहरण: पावर ग्रिड पर RedEcho हमला; AIIMS रैंसमवेयर (2022)
8. विदेशी-वित्तपोषित NGOs (आरोपित)
- गलत सूचना, विकास-विरोधी विरोध
- उदाहरण: ग्रीनपीस और एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया का FCRA रद्द
- कुडनकुलम परमाणु संयंत्र विरोधी विरोध
9. धार्मिक उग्रवादी
- सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, नफरत फैलाना, युवाओं का कट्टरपंथीकरण
- डेटा: PFI (2022 में प्रतिबंधित) के कार्यकर्ताओं को सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के लिए केरल में गिरफ्तार किया गया (2023)
- उदाहरण: मुजफ्फरनगर दंगे (2013)
भारत में आतंकवाद
परिभाषा और मुख्य तत्व
UAPA धारा 15 परिभाषा : घातक हथियारों, विस्फोटकों, या खतरनाक साधनों का उपयोग करके मृत्यु, चोट, या संपत्ति क्षति का कारण बनने के लिए भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, या संप्रभुता को खतरे में डालने वाला कोई भी कार्य
मुख्य तत्व:
- वैचारिक/राजनीतिक प्रेरणा : राजनीतिक, धार्मिक, या अलगाववादी उद्देश्यों से प्रेरित
- गैर-लड़ाकों को निशाना बनाना : मनोवैज्ञानिक प्रभाव को अधिकतम करता है; "एक को मारो, हजारों को डराओ"
- सरकार को प्रभावित करने का इरादा : रियायतों के लिए अधिकारियों पर दबाव डालने के लिए भय पैदा करता है
- संगठित गैर-राज्य कर्ता : समूहों को अक्सर सीमापार राज्य समर्थन प्राप्त होता है
भारत में आतंकवाद का वर्गीकरण
1. सीमापार आतंकवाद
- J&K में पाकिस्तान-समर्थित जिहादी आतंकवाद
- डेटा: 2019 के बाद, सालाना 130+ घुसपैठ प्रयास विफल (MHA)
- उदाहरण: पुलवामा (2019) - 40 CRPF शहीद; URI (2016); पहलगाम (2025) - 26 नागरिक
- पाकिस्तान का ISI LeT, JeM को वित्तपोषण, प्रशिक्षण, और सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है
2. पूर्वोत्तर उग्रवाद
- स्वायत्तता/अलगाव की मांग करने वाले जातीय-राष्ट्रवादी आंदोलन
- डेटा: 500+ जातीय समूह; NE से 25 MPs (543 में से)
- उदाहरण: NSCN-IM/K (नागालैंड); ULFA (असम); मणिपुर जातीय संघर्ष (2023-जारी)
- डेटा: मैतेई-कुकी हिंसा: 250+ मारे गए, 60,000+ विस्थापित
3. वामपंथी उग्रवाद (माओवाद)
- रेड कॉरिडोर राज्यों में माओवादी उग्रवाद
- डेटा: प्रभावित जिले 126 (2014 से पहले) से गिरकर 38 (2024)
- उदाहरण: दंतेवाड़ा हमले (2010, 2023); ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट (2025)
- पिछले दशक में घटनाओं में 53% गिरावट
4. हिंटरलैंड/शहरी आतंकवाद
- इस्लामवादी नेटवर्क द्वारा शहरी आतंकवाद
- उदाहरण: 1993 मुंबई ब्लास्ट (BSE लक्षित); इंडियन मुजाहिदीन हमले; 26/11
- केरल, हैदराबाद में ISIS मॉड्यूल का पता चला
रणनीति के अनुसार प्रकार:
- साइबर-आतंकवाद: डिजिटल बुनियादी ढांचे पर हमले; भारत दूसरे सबसे अधिक लक्षित राष्ट्र (2024)
- जातीय-राष्ट्रवादी: अलग राज्य की मांग (तमिल टाइगर्स, NE समूह)
- परमाणु आतंकवाद: परमाणु सामग्री का उपयोग/खतरा
- दक्षिणपंथी: राष्ट्रवादी/फासीवादी राज्य उद्देश्य
- वामपंथी: साम्यवादी क्रांति के लिए नक्सलवादी
- नार्को-आतंकवाद: राज्य नीतियों को प्रभावित करने वाले ड्रग तस्कर
- जैव-आतंकवाद: जैविक एजेंटों का उपयोग
भारत में आतंकवाद का इतिहास
चरण 1: 1970 से पहले - वैचारिक और अलगाववादी जड़ें
- नागा उग्रवाद (1950 के दशक); नक्सलबाड़ी विद्रोह (1967)
- जातीय राष्ट्रवाद और साम्यवादी क्रांति की शुरुआत
चरण 2: 1980 के दशक - जातीय-धार्मिक उग्रवाद
- उदाहरण: ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984) - 500+ मारे गए; कनिष्क बमबारी (1985) - 329 मारे गए
- खालिस्तान आंदोलन चरम पर; पंजाब उग्रवाद
चरण 3: 1990 के दशक - कश्मीर उग्रवाद
- पाकिस्तान-प्रायोजित सीमापार आतंकवाद शुरू
- उदाहरण: कश्मीरी पंडित पलायन (1990) - 100,000+ विस्थापित; संसद हमला (2001)
- पाकिस्तान द्वारा प्रॉक्सी वॉर सिद्धांत औपचारिक
चरण 4: 2000 के दशक - शहरी आतंकवाद और इंडियन मुजाहिदीन
- अधिकतम प्रभाव के लिए शहरी केंद्रों में बदलाव
- उदाहरण: मुंबई ट्रेन ब्लास्ट (2006) - 209 मारे गए; 26/11 मुंबई हमले (2008) - 166 मारे गए
- भारतीय शहरों में IM द्वारा सीरियल बमबारी
चरण 5: 2010 के दशक - वैश्विक जिहाद प्रभाव
- भारतीय युवाओं की ISIS भर्ती
- उदाहरण: केरल ISIS मॉड्यूल; बुरहान वानी (2016) - सोशल मीडिया कट्टरपंथीकरण
- ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण और एन्क्रिप्टेड संचार का उदय
चरण 6: 2020 के दशक - हाइब्रिड युद्ध और टेक-चालित आतंकवाद
- ड्रोन, साइबर हमले, प्रॉक्सी आउटफिट
- उदाहरण: पुलवामा (2019); जम्मू IAF ड्रोन हमला (2021); पहलगाम (2025)
- डेटा: BSF ने पंजाब में 294 ड्रोन बरामद किए (2024); 2025 में 100+
- ऑपरेशन सिंदूर (2025) - भारत की पहली एकीकृत सैन्य प्रतिक्रिया
आतंकवाद के उद्देश्य
- राजनीतिक अस्थिरता : सरकार को कमजोर करना, जनता का विश्वास कम करना; उदा: संसद हमला (2001)
- अलगाव/स्वायत्तता : अलग मातृभूमि; उदा: खालिस्तान, ULFA, NSCN
- प्रचार और प्रसार : "आतंकवाद थिएटर है"; वित्तपोषण और भर्ती आकर्षित करना
- धार्मिक कट्टरपंथीकरण : धार्मिक विचारधारा थोपना; उदा: ISIS-प्रेरित मॉड्यूल
- भय फैलाना : मनोवैज्ञानिक आघात; उदा: 26/11, सीरियल बमबारी
- सांप्रदायिक दंगे भड़काना : धार्मिक विभाजन गहरा करना
- आर्थिक व्यवधान : आर्थिक केंद्रों को पंगु बनाना; उदा: 1993 मुंबई ब्लास्ट (BSE लक्षित)
- सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना : घात, IEDs; उदा: पुलवामा, दंतेवाड़ा
- राज्य प्रॉक्सी के रूप में कार्य : ISI समर्थन से सीमापार हमले
आतंकवादियों द्वारा उपयोग की जाने वाली विधियां
- बमबारी/IEDs : उदा: दिल्ली ब्लास्ट (2005), दंतेवाड़ा IED (2023)
- आत्मघाती हमले : उदा: पुलवामा (2019), संसद हमला (2001)
- लक्षित हत्याएं : उदा: इंदिरा गांधी (1984), राजीव गांधी (1991)
- सामूहिक गोलीबारी : उदा: 26/11 मुंबई हमले
- अपहरण/बंधक : उदा: IC-814 (1999)
- साइबर आतंकवाद : बुनियादी ढांचे को बाधित करना, गलत सूचना फैलाना
- ड्रोन-आधारित हमले : उदा: जम्मू वायु सेना स्टेशन (2021)
- एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग : भर्ती के लिए टेलीग्राम, व्हाट्सएप
- नार्को-आतंकवाद : पंजाब के माध्यम से हेरोइन; ULFA-मादक पदार्थ संबंध
- FICN परिसंचरण : बांग्लादेश और नेपाल के माध्यम से
- सीमापार घुसपैठ : LeT द्वारा LoC घुसपैठ
- फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन : दंगे भड़काने के लिए हमले
उभरते रुझान
- आतंक-अपराध गठजोड़ : खालिस्तानी उग्रवादियों से जुड़ी ड्रग/हथियार तस्करी (2025 पंजाब)
- साइबर आतंकवाद : भारत दूसरा सबसे लक्षित राष्ट्र (2024); 95 संस्थाएं डेटा चोरी से प्रभावित
- ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण : सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय युवाओं पर ISIS का प्रभाव
- लोन वुल्फ हमले : स्व-कट्टरपंथी व्यक्ति; उदा: 2020 दिल्ली गिरफ्तारी
- ड्रोन आतंकवाद : जम्मू IAF बेस पर पहला आतंकी ड्रोन हमला (जून 2021)
- प्रॉक्सी आउटफिट : LeT/JeM "द रेजिस्टेंस फ्रंट" जैसे उपनामों का उपयोग (2019)
- नार्को-आतंकवाद : गुजरात/पंजाब में गोल्डन क्रिसेंट हेरोइन
- शहरी आतंकवाद : मीडिया कवरेज के लिए शहरों में बदलाव; उदा: 26/11, ढाका (2016)
- ग्रे-जोन युद्ध : खुले संघर्ष सीमा से नीचे अस्पष्ट रणनीति
आतंक वित्तपोषण
आतंक वित्तपोषण के तरीके
- हवाला और कैश कूरियर : अनौपचारिक नेटवर्क; उदा: IM ने दुबई-नेपाल मार्गों का उपयोग किया
- जाली मुद्रा (FICN) : पाकिस्तान में मुद्रित; अर्थव्यवस्था को अस्थिर करती है
- संगठित अपराध : ड्रग तस्करी, हथियार तस्करी, जबरन वसूली
- धर्मार्थ मोर्चे (NPOs) : अलगाववादियों को धन देने वाले NGOs (हुर्रियत केस)
- राज्य प्रायोजन : पाकिस्तान ISI के माध्यम से प्रत्यक्ष नकद, हथियार, प्रशिक्षण
- क्रिप्टोकरेंसी : बैंक निगरानी को दरकिनार करने वाले एन्क्रिप्टेड चैनल
- दुरुपयोग किए गए जकात फंड : उग्रवादी चैरिटी को खाड़ी दान
- क्राउडफंडिंग : "पीड़ित" दान के लिए दुरुपयोग किए गए प्लेटफॉर्म
आतंक वित्तपोषण का मुकाबला करने में चुनौतियां
- अनौपचारिक चैनल : हवाला विनियमित बैंकिंग के बाहर संचालित
- सीमित फोरेंसिक : ब्लॉकचेन ट्रैकिंग में प्रशिक्षित कर्मियों की कमी
- अंतर-एजेंसी साइलो : NIA, ED, FIU, राज्य पुलिस में रीयल-टाइम एकीकरण की कमी
- संपत्ति फ्रीजिंग देरी : नौकरशाही/कानूनी देरी पुनर्मार्ग की अनुमति देती है
- क्रिप्टो और डार्क वेब : रीयल-टाइम ट्रैकिंग के लिए कोई समर्पित कानून नहीं
- विनियामक अंतराल : NBFCs, प्रीपेड वॉलेट की कमजोर निगरानी
- NGO दुरुपयोग : नकद प्रवाह की अपर्याप्त जांच
- सीमापार चुनौतियां : पाकिस्तान से सहयोग की कमी
सरकारी प्रति-उपाय
कानूनी ढांचा:
- UAPA, 1967 : आतंकवादियों की संपत्ति जब्त, खाते फ्रीज
- PMLA, 2002 : अपराध की आय को कुर्क/जब्त करना
- FCRA, 2010 (संशोधित 2020) : विदेशी-वित्तपोषित NGOs का विनियमन
संस्थागत ढांचा:
- FIU-IND : संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की ट्रैकिंग
- प्रवर्तन निदेशालय : मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
- NIA : UAPA/PMLA के तहत आतंक वित्तपोषण की जांच
- NATGRID : रीयल-टाइम ट्रैकिंग के लिए डेटाबेस एकीकरण
निगरानी और तकनीक:
- वित्तीय संस्थानों के लिए अनिवार्य KYC/AML मानदंड
- FIU-IND को संदिग्ध लेनदेन रिपोर्टिंग (STR)
- संघर्ष क्षेत्रों में क्रिप्टो लेनदेन की जियोफेंसिंग (2025)
आतंकवाद और संगठित अपराध पर UN संधियां
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी सम्मेलन
| संधि | वर्ष | मुख्य फोकस |
|---|---|---|
| आतंकवादी बमबारी के दमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन | 1997 | सार्वजनिक स्थानों पर विस्फोटकों की गैरकानूनी डिलीवरी/विस्फोट को अपराध बनाना; सार्वभौमिक क्षेत्राधिकार |
| आतंकवाद के वित्तपोषण के दमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन | 1999 | आतंकवादी कृत्यों के लिए धन के प्रावधान/संग्रह को अपराध बनाना; संपत्ति फ्रीजिंग दायित्व |
| परमाणु आतंकवाद के कृत्यों के दमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन | 2005 | हानि पहुंचाने के इरादे से रेडियोधर्मी सामग्री/उपकरण का कब्जा/उपयोग; परमाणु सुविधाओं को कवर करता है |
भारत की स्थिति:
- तीनों सम्मेलनों का अनुसमर्थन
- UAPA, PMLA, परमाणु ऊर्जा अधिनियम के माध्यम से कार्यान्वित
- FATF, एगमोंट ग्रुप में सक्रिय भागीदारी
- 1996 से UN में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (CCIT) की वकालत
UNTOC - संगठित अपराध सम्मेलन (पालेर्मो सम्मेलन)
अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ UN सम्मेलन (2000):
- संगठित अपराध के खिलाफ पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय साधन
- कवर करता है: मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार, न्याय में बाधा
- स्थापित करता है: परस्पर कानूनी सहायता, प्रत्यर्पण, संयुक्त जांच
पूरक प्रोटोकॉल:
| प्रोटोकॉल | वर्ष | फोकस |
|---|---|---|
| व्यक्तियों की तस्करी रोकने का प्रोटोकॉल | 2000 | मानव तस्करी को अपराध बनाना, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की; पीड़ित सुरक्षा |
| प्रवासियों की तस्करी के खिलाफ प्रोटोकॉल | 2000 | भूमि, समुद्र, वायु द्वारा प्रवासियों की तस्करी को अपराध बनाना; तस्करी से भेद |
| आग्नेयास्त्र तस्करी के खिलाफ प्रोटोकॉल | 2001 | आग्नेयास्त्रों, पुर्जों, गोला-बारूद का अवैध निर्माण और तस्करी |
भारत की स्थिति:
- UNTOC (2011) और तस्करी प्रोटोकॉल का अनुसमर्थन
- के लिए महत्वपूर्ण: डी-कंपनी गठजोड़, गोल्डन ट्रायंगल ड्रग मार्ग, जाली भारतीय मुद्रा नोट (FICN)
भ्रष्टाचार के खिलाफ UN सम्मेलन (UNCAC)
UNCAC (2003):
- पहला वैश्विक कानूनी रूप से बाध्यकारी भ्रष्टाचार-विरोधी साधन
- कवर करता है: रोकथाम, अपराधीकरण, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, संपत्ति वसूली
मुख्य प्रावधान:
- निवारक उपाय → भ्रष्टाचार-विरोधी निकाय, सार्वजनिक क्षेत्र पारदर्शिता, आचार संहिता
- अपराधीकरण → रिश्वतखोरी, गबन, प्रभाव में व्यापार, मनी लॉन्ड्रिंग
- संपत्ति वसूली → चोरी की संपत्ति वापस करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग → परस्पर कानूनी सहायता, प्रत्यर्पण
भारत की स्थिति:
- UNCAC का अनुसमर्थन (2011)
- कार्यान्वित: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, लोकपाल अधिनियम 2013, बेनामी लेनदेन अधिनियम
- चुनौतियां: दोषसिद्धि दर, राजनीतिक इच्छाशक्ति, संपत्ति वसूली तंत्र
निरस्त्रीकरण संधियां
| संधि | वर्ष | मुख्य प्रावधान |
|---|---|---|
| व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि (CTBT) | 1996 | सभी परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध; अंतर्राष्ट्रीय निगरानी प्रणाली; अभी लागू नहीं |
| कार्मिक-विरोधी खदान सम्मेलन (ओटावा संधि) | 1997 | कार्मिक-विरोधी खदानों के उपयोग, भंडारण, उत्पादन, स्थानांतरण पर प्रतिबंध |
CTBT:
- लागू होने के लिए 44 अनुलग्नक-2 राज्यों द्वारा अनुसमर्थन आवश्यक
- भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए (स्थिति: पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण से जुड़ा)
- भारत परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक मोरेटोरियम बनाए रखता है
ओटावा संधि (खदान प्रतिबंध सम्मेलन):
- भारत हस्ताक्षरकर्ता नहीं है
- चिंताएं: पाकिस्तान और चीन के साथ लंबी सीमा, सुरक्षा आवश्यकताएं
- भारत मानवीय खदान निष्क्रियण प्रयासों में भाग लेता है
भारत की निरस्त्रीकरण स्थिति:
- वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन
- समयबद्ध, सार्वभौमिक, गैर-भेदभावपूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत
- CD (निरस्त्रीकरण सम्मेलन) का सदस्य
- NPT समीक्षा सम्मेलनों में पर्यवेक्षक के रूप में भागीदारी
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- FATF : भारत 2010 से पूर्ण सदस्य; "नियमित अनुवर्ती" में (उच्चतम रेटिंग)
- UNSCR 1373 : आतंक वित्तपोषण को अपराध बनाने का आदेश
- UNSCR 1267 : अल-कायदा, ISIS के खिलाफ प्रतिबंध
- एगमोंट ग्रुप : वित्तीय खुफिया साझा करने वाले 170+ FIUs
- पालेर्मो सम्मेलन : अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध को संबोधित
- MLATs : सूचना आदान-प्रदान के लिए USA, UK, फ्रांस, रूस के साथ द्विपक्षीय संधियां
- नो मनी फॉर टेरर कॉन्फ्रेंस : भारत द्वारा आयोजित (2022)
आतंकवाद-विरोधी वास्तुकला
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
कानूनी आधार : NIA अधिनियम, 2008 (संशोधित 2019)
| शक्ति | विवरण | धारा |
|---|---|---|
| स्थापना | अनुसूचित अपराधों की जांच | धारा 3 |
| स्वप्रेरणा शक्ति | राज्य की सहमति के बिना अधिग्रहण | धारा 6(4) |
| अखिल-भारतीय क्षेत्राधिकार | अधिकारियों के पास पूरे भारत में शक्तियां | धारा 3(2) |
| अतिरिक्त-क्षेत्रीय | भारत के बाहर अपराधों की जांच | धारा 6(8) |
| संबद्ध अपराध | संबंधित अपराधों की जांच | धारा 8 |
अनुसूचित अपराध : UAPA, शस्त्र अधिनियम, IPC (121-130, 370, 489A-489E), विस्फोटक अधिनियम
FIU-IND (वित्तीय खुफिया इकाई)
कानूनी आधार : PMLA, 2002; वित्त मंत्रालय के अधीन
मुख्य शक्तियां:
- बैंकों, NBFCs, क्रिप्टो एक्सचेंजों से STRs, CTRs प्राप्त करता है
- एनालिटिक्स का उपयोग करके संदिग्ध पैटर्न का पता लगाता है
- जुर्माना लगाता है (Binance ₹18.82 करोड़, Bybit ₹9.27 करोड़)
- ED, CBI, NIA, CBDT, DGGI के साथ खुफिया साझा करता है
- एगमोंट ग्रुप का सक्रिय सदस्य
मुद्दे:
- सीमित स्वायत्तता (वित्त मंत्रालय के अधीन)
- जनशक्ति और क्षमता अंतराल
- कमजोर अंतर-एजेंसी समन्वय
- सीमित AI फ़िल्टरिंग के साथ डेटा अधिभार
- अभियोजन में कम रूपांतरण
UAPA - मुख्य प्रावधान
| प्रावधान | धारा | विवरण |
|---|---|---|
| गैरकानूनी गतिविधि | 2(o) | संप्रभुता, अखंडता पर प्रश्न उठाने, अलगाव को बढ़ावा देने वाले कार्य |
| गैरकानूनी संघ | 3 | सरकार संघों को गैरकानूनी घोषित कर सकती है (SIMI, PFI) |
| आतंकवादी कृत्य | 15-23 | मृत्यु, संपत्ति क्षति, वित्तपोषण, आतंकवादियों को शरण |
| संगठन पदनाम | 35 (अनुसूची I) | संगठनों को आतंकवादी संस्थाओं के रूप में सूचीबद्ध |
| व्यक्तिगत पदनाम | 35 (2019) | दोषसिद्धि के बिना व्यक्तियों को आतंकवादी के रूप में लेबल करना |
| जांच शक्तियां | 43 | भारत और विदेश में NIA शक्तियां |
| जमानत प्रावधान | 43D(5) | कठोर; यदि आरोप प्रथम दृष्टया सत्य हों तो कोई जमानत नहीं |
| विस्तारित हिरासत | 43D(2) | आरोप पत्र से पहले 180 दिन |
मुद्दे:
- कम दोषसिद्धि दर (~2%)
- अनुच्छेद 14, 19, 21 को प्रभावित करता है
- अस्पष्ट परिभाषाएं व्याख्या के लिए खुली
- कोई स्वतंत्र निरीक्षण नहीं
- कार्यकर्ताओं, पत्रकारों के खिलाफ इस्तेमाल
नार्को-आतंकवाद
भारत की भेद्यता
- गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड) के बीच स्थित
- पाकिस्तान J&K उग्रवाद के लिए ड्रग मनी का उपयोग करता है; भारत-पाक सीमा से हेरोइन
- NE उग्रवादी म्यांमार सीमा का शोषण (मोरेह गलियारा)
- कमजोर तटीय निगरानी (7,500 किमी तटरेखा)
- पंजाब, NE, शहरी झुग्गियों में युवा नशा संकट
- अंतरराष्ट्रीय कार्टेल (कनाडा, UAE) भारत-विरोधी समूहों को वित्तपोषित करते हैं
आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव
- आतंक वित्तपोषण : LeT, JeM, NE उग्रवादी समूहों को वित्तपोषित करता है
- हथियार तस्करी : विस्फोटकों के लिए ड्रग मार्गों का उपयोग
- युवा कट्टरपंथीकरण : उच्च नशा युवाओं को संवेदनशील बनाता है
- भ्रष्टाचार : कानून प्रवर्तन, राजनीति को कमजोर करता है
- सीमा अस्थिरता : उग्रवाद और नार्को-अपराध के दोहरे खतरे
- आर्थिक प्रभाव : रियल एस्टेट में काला धन
सरकारी पहलें
| श्रेणी | उपाय |
|---|---|
| विधायी | NDPS अधिनियम 1985, UAPA 1967, PMLA 2002 |
| प्रवर्तन | NCB (नोडल एजेंसी), नार्कोटिक्स-विरोधी टास्क फोर्स, NIA/ED भागीदारी |
| तकनीक | AI-आधारित पहचान, ड्रोन निगरानी, CIBMS स्मार्ट फेंसिंग |
| जागरूकता | नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) |
| न्यायिक | सीमा जिलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट |
| वैश्विक | UNODC समन्वय, पेरिस पैक्ट पहल |
आगे का रास्ता
व्यापक दृष्टिकोण
- राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति : रक्षा, खुफिया, कानून प्रवर्तन को एकीकृत करने वाला एकीकृत सिद्धांत
- खुफिया समन्वय : IB, NIA, RAW, राज्य एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम साझाकरण; NATGRID/CCTNS का संचालन
- कानूनी सुधार : UAPA/PMLA मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट; समर्पित आतंक वित्तपोषण न्यायाधिकरण
- वित्तपोषण बाधित करें : AI के साथ FIU-IND को मजबूत करें; क्रिप्टो विनियमन अनिवार्य; NGO ऑडिट
- तकनीक : CERT-In के तहत साइबर आतंकवाद टास्क फोर्स; स्लीपर सेल पहचान के लिए AI
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग : आतंकवाद पर UN व्यापक सम्मेलन के लिए दबाव; Interpol/FATF सहयोग बढ़ाएं
- कट्टरपंथीकरण-विरोध : नागरिक समाज, धार्मिक नेताओं को शामिल करें; जेल पुनर्वास कार्यक्रम
- सीमा सुरक्षा : CIBMS पूर्ण करें; ड्रोन निगरानी और स्मार्ट फेंसिंग का विस्तार
- प्रतिक्रिया का राजनीतिकरण रोकें : द्विदलीय सहमति; खुफिया-चालित संचालन
- क्षमता निर्माण : टेक-सक्षम आतंकवाद में प्रशिक्षण; अंतःविषय टास्क फोर्स