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इलेक्ट्रिक वाहन

परिचय

संदर्भ: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए e-मोबिलिटी की ओर वैश्विक बदलाव।

  • दक्षता: इलेक्ट्रिक मोटर 80-85% ऊर्जा परिवर्तित करते हैं बनाम आंतरिक दहन इंजन (ICE) के 25-35%
  • भारत की स्थिति: प्रारंभिक चरण (कुल वाहनों का 0.6%)। 2W और 3W का प्रभुत्व (EVs का 97%)।
  • लक्ष्य: 2030 तक 30% बिक्री हिस्सेदारी। NITI Aayog 2030 तक 2W/3W में 86% प्रवेश का अनुमान लगाता है।

भारत के लिए EVs क्यों?

  1. प्रदूषण: परिवहन दिल्ली के PM 2.5 में ~40% योगदान देता है। EVs में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन है।
  2. ऊर्जा सुरक्षा: भारत 85% कच्चे तेल का आयात करता है (FY22 में $94 बिलियन)। EVs इस निर्भरता को कम करते हैं।
  3. जलवायु लक्ष्य: परिवहन का डीकार्बोनाइजेशन (कुल GHG उत्सर्जन का 13%)।
बैटरी प्रौद्योगिकी और अर्थशास्त्र

बैटरी रसायन विज्ञान:

  • Li-Ion: मानक।
    • NMC (निकेल-मैंगनीज-कोबाल्ट): उच्च ऊर्जा घनत्व। महंगा।
    • LFP (लिथियम-आयरन-फॉस्फेट): सस्ता, सुरक्षित, गर्मी-सहिष्णु। भारत में हिस्सेदारी बढ़ रही है।
  • लागत: बैटरी = EV लागत का 30-40%। कीमतें गिर रही हैं लेकिन खनिज कीमतों के कारण अस्थिर।

लागत तुलना (TCO):

  • अग्रिम: EV > पेट्रोल (सब्सिडी के बिना)।
  • चलने की लागत: EV (~₹1/km) << पेट्रोल (~₹6/km)।
  • FAME-II सब्सिडी के साथ: 2W EV का TCO अब पेट्रोल 2W के तुलनीय/कम है।
अपनाने में चुनौतियां

1. महत्वपूर्ण खनिज (आपूर्ति श्रृंखला जोखिम):

  • लिथियम: त्रिकोण (चिली, अर्जेंटीना, बोलीविया) + ऑस्ट्रेलिया।
  • प्रसंस्करण: चीन ~60-70% शोधन को नियंत्रित करता है।
  • भारत की स्थिति: अत्यधिक आयात निर्भर। रणनीतिक साझेदारी (KABIL) जारी है।

2. चार्जिंग बुनियादी ढांचा:

  • रेंज एंजाइटी: सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की कमी।
  • ग्रिड प्रभाव: अप्रबंधित चार्जिंग पीक मांग को बढ़ा सकती है।
  • डिस्कॉम वित्त: EV चार्जिंग के लिए सब्सिडी वाली कृषि बिजली का उपयोग करने का जोखिम।

3. पर्यावरणीय (छिपी लागत):

  • "वेल-टू-व्हील" उत्सर्जन: यदि चार्जिंग बिजली कोयले से आती है (भारत में 70%), तो GHG कमी कम है।
  • बैटरी अपशिष्ट: विषाक्त सामग्री। रीसाइक्लिंग ऊर्जा-गहन और वर्तमान में महंगी है।

4. राजकोषीय प्रभाव:

  • सरकारी राजस्व: पेट्रोल/डीजल पर उच्च करों (उत्पाद शुल्क + VAT) का संभावित नुकसान।
  • सब्सिडी बोझ: FAME और PLI योजनाएं राजकोष पर दबाव डालती हैं।
सरकारी नीति ढांचा

1. मांग पक्ष:

  • FAME-II: ₹10,000 करोड़ परिव्यय। 2W, 3W, 4W (वाणिज्यिक) और बसों के लिए सब्सिडी।
  • कर: GST @ 5%। आयकर कटौती (धारा 80EEB)।

2. आपूर्ति पक्ष:

  • PLI ऑटो: उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी के लिए ₹26,000 करोड़।
  • PLI ACC बैटरी: 50 GWh बैटरी निर्माण के लिए ₹18,100 करोड़।

3. बुनियादी ढांचा:

  • चार्जिंग दिशानिर्देश: डीलाइसेंस्ड गतिविधि।
  • बैटरी स्वैपिंग नीति: बैटरी लागत को वाहन लागत से अलग करने के लिए (BaaS - बैटरी एज ए सर्विस)।
भविष्य का दृष्टिकोण
  • ग्रीन हाइड्रोजन: लंबी दूरी के ट्रकों/बसों के लिए FCEVs (फ्यूल सेल EVs) जहां बैटरी बहुत भारी हैं।
  • रीसाइक्लिंग: पुरानी बैटरियों से लिथियम/कोबाल्ट का अर्बन माइनिंग।
  • V2G (वाहन से ग्रिड): EVs ग्रिड के लिए स्टोरेज के रूप में कार्य करते हैं।
मेन्स PYQ दृष्टिकोण

प्र. "इलेक्ट्रिक वाहनों को गतिशीलता का भविष्य माना जाता है। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला और EV बैटरियों के निपटान से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करें।"

संरचना:

  1. परिचय: EV क्रांति और भारत का EV30@30 लक्ष्य।
  2. आपूर्ति श्रृंखला चुनौतियां:
    • एकाग्रता: प्रसंस्करण में चीन का प्रभुत्व।
    • भू-राजनीति: "नया तेल" के रूप में लिथियम।
    • मूल्य अस्थिरता: EV सामर्थ्य पर प्रभाव।
  3. निपटान चुनौतियां:
    • मात्रा: 2030 तक e-अपशिष्ट की सुनामी अपेक्षित।
    • विषाक्तता: आग का खतरा, मिट्टी का प्रदूषण।
    • रीसाइक्लिंग अंतर: औपचारिक रीसाइक्लिंग बुनियादी ढांचे की कमी।
  4. आगे का रास्ता:
    • विविधीकरण: विदेश में संपत्ति अर्जित करने के लिए KABIL (खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड)।
    • चक्रीय अर्थव्यवस्था: बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2022 (EPR लक्ष्य)।
    • R&D: सोडियम-आयन बैटरी (प्रचुर सामग्री)।