निवेश मॉडल - मुख्य परीक्षा
निवेश का महत्व
अर्थ: भविष्य में आय या लाभ उत्पन्न करने के लिए पूंजी का उपयोग।
महत्व:
- पूंजी निर्माण: बुनियादी ढांचे और तकनीक में वृद्धि।
- रोजगार सृजन: उद्योगों के विस्तार से नई नौकरियों का निर्माण।
- तकनीकी हस्तांतरण: विदेशी निवेश (FDI) के साथ आधुनिक तकनीक का आना।
- आर्थिक विकास: उच्च निवेश दर उच्च जीडीपी वृद्धि से जुड़ी है।
- प्रतिस्पर्धात्मकता: उत्पादन लागत में कमी और वैश्विक बाजार में पहुंच।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बनाम विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)
| विशेषता | प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) | विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) |
|---|---|---|
| अर्थ | किसी विदेशी कंपनी में भौतिक संपत्ति या स्वामित्व में निवेश। | वित्तीय परिसंपत्तियों (शेयर, बॉन्ड) में निवेश। |
| प्रकृति | दीर्घकालिक और स्थिर। | अल्पकालिक और अस्थिर ("Hot Money")। |
| नियंत्रण | निवेशक का कंपनी के प्रबंधन पर नियंत्रण होता है। | प्रबंधन पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं। |
| प्रविष्टि/निकास | कठिन और समय लेने वाला। | बहुत आसान और त्वरित। |
| अर्थव्यवस्था पर प्रभाव | प्रत्यक्ष पूंजी और रोजगार सृजन। | बाजार तरलता और मुद्रा मूल्य पर प्रभाव। |
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल
- बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT): निजी क्षेत्र परियोजना बनाता है, टोल के माध्यम से लागत वसूलता है और फिर सरकार को सौंप देता है।
- इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC): सरकार पूरी लागत वहन करती है; निजी क्षेत्र केवल निर्माण के लिए जिम्मेदार है।
- हाइब्रिड एनुअिटी मॉडल (HAM): सरकार लागत का 40% भुगतान करती है, बाकी 60% निजी क्षेत्र जुटाता है। टोल संग्रह का जोखिम सरकार का होता है।
- स्विस चैलेंज मॉडल: एक निवेशक एक प्रस्ताव देता है, और सरकार दूसरों को उसे चुनौती देने (बेहतर प्रस्ताव देने) के लिए आमंत्रित करती है।
- टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT): पहले से बनी सड़कों को एक निश्चित अवधि के लिए निजी क्षेत्र को पट्टे पर देना।
निवेश की चुनौतियां
- नियामक अनिश्चितता: पूर्वव्यापी कराधान (Retroactive Tax) और नीतिगत बदलावों का डर।
- भूमि अधिग्रहण: विवादों के कारण परियोजनाओं में देरी।
- दोहरी बैलेंस शीट समस्या: बैंकों और कॉर्पोरेट घरानों के पास फंसे हुए ऋण (NPA)।
- अनुबंध प्रवर्तन: कानूनी देरी और विवाद समाधान में समय लगना।
- बुनियादी ढांचे की कमी: खराब लॉजिस्टिक्स लागत को बढ़ाती है।
सरकारी पहल
- नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP): निवेश के लिए स्पष्ट रोडमैप।
- राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP): निष्क्रिय सरकारी संपत्तियों से पूंजी जुटाना।
- उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI): विनिर्माण में निवेश आकर्षित करने के लिए।
- NIIF (राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढांचा कोष): दीर्घकालिक पूंजी के लिए।
- मेक इन इंडिया 2.0: निवेश आकर्षित करने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
आगे का रास्ता (Way Forward)
- व्यवसाय करने में आसानी (Ease of Doing Business): एकल खिड़की निकासी (Single Window Clearance)।
- विवाद समाधान: कुशल और त्वरित मध्यस्थता (Arbitration) तंत्र।
- स्थिर कर नीति: निवेशकों के विश्वास के लिए।
- शिक्षा और कौशल: निवेश के लाभ उठाने के लिए कुशल श्रम शक्ति।