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निवेश मॉडल - मुख्य परीक्षा

निवेश का महत्व

अर्थ: भविष्य में आय या लाभ उत्पन्न करने के लिए पूंजी का उपयोग।

महत्व:

  1. पूंजी निर्माण: बुनियादी ढांचे और तकनीक में वृद्धि।
  2. रोजगार सृजन: उद्योगों के विस्तार से नई नौकरियों का निर्माण।
  3. तकनीकी हस्तांतरण: विदेशी निवेश (FDI) के साथ आधुनिक तकनीक का आना।
  4. आर्थिक विकास: उच्च निवेश दर उच्च जीडीपी वृद्धि से जुड़ी है।
  5. प्रतिस्पर्धात्मकता: उत्पादन लागत में कमी और वैश्विक बाजार में पहुंच।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बनाम विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)
विशेषताप्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)
अर्थकिसी विदेशी कंपनी में भौतिक संपत्ति या स्वामित्व में निवेश।वित्तीय परिसंपत्तियों (शेयर, बॉन्ड) में निवेश।
प्रकृतिदीर्घकालिक और स्थिर।अल्पकालिक और अस्थिर ("Hot Money")।
नियंत्रणनिवेशक का कंपनी के प्रबंधन पर नियंत्रण होता है।प्रबंधन पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं।
प्रविष्टि/निकासकठिन और समय लेने वाला।बहुत आसान और त्वरित।
अर्थव्यवस्था पर प्रभावप्रत्यक्ष पूंजी और रोजगार सृजन।बाजार तरलता और मुद्रा मूल्य पर प्रभाव।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल
  1. बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT): निजी क्षेत्र परियोजना बनाता है, टोल के माध्यम से लागत वसूलता है और फिर सरकार को सौंप देता है।
  2. इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC): सरकार पूरी लागत वहन करती है; निजी क्षेत्र केवल निर्माण के लिए जिम्मेदार है।
  3. हाइब्रिड एनुअिटी मॉडल (HAM): सरकार लागत का 40% भुगतान करती है, बाकी 60% निजी क्षेत्र जुटाता है। टोल संग्रह का जोखिम सरकार का होता है।
  4. स्विस चैलेंज मॉडल: एक निवेशक एक प्रस्ताव देता है, और सरकार दूसरों को उसे चुनौती देने (बेहतर प्रस्ताव देने) के लिए आमंत्रित करती है।
  5. टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT): पहले से बनी सड़कों को एक निश्चित अवधि के लिए निजी क्षेत्र को पट्टे पर देना।
निवेश की चुनौतियां
  1. नियामक अनिश्चितता: पूर्वव्यापी कराधान (Retroactive Tax) और नीतिगत बदलावों का डर।
  2. भूमि अधिग्रहण: विवादों के कारण परियोजनाओं में देरी।
  3. दोहरी बैलेंस शीट समस्या: बैंकों और कॉर्पोरेट घरानों के पास फंसे हुए ऋण (NPA)।
  4. अनुबंध प्रवर्तन: कानूनी देरी और विवाद समाधान में समय लगना।
  5. बुनियादी ढांचे की कमी: खराब लॉजिस्टिक्स लागत को बढ़ाती है।
सरकारी पहल
  1. नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP): निवेश के लिए स्पष्ट रोडमैप।
  2. राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP): निष्क्रिय सरकारी संपत्तियों से पूंजी जुटाना।
  3. उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI): विनिर्माण में निवेश आकर्षित करने के लिए।
  4. NIIF (राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढांचा कोष): दीर्घकालिक पूंजी के लिए।
  5. मेक इन इंडिया 2.0: निवेश आकर्षित करने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
आगे का रास्ता (Way Forward)
  • व्यवसाय करने में आसानी (Ease of Doing Business): एकल खिड़की निकासी (Single Window Clearance)।
  • विवाद समाधान: कुशल और त्वरित मध्यस्थता (Arbitration) तंत्र।
  • स्थिर कर नीति: निवेशकों के विश्वास के लिए।
  • शिक्षा और कौशल: निवेश के लाभ उठाने के लिए कुशल श्रम शक्ति।