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उदारीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव

परिचय: 1991 के आर्थिक सुधारों (LPG - उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को 'लाइसेंस राज' से मुक्त कर वैश्विक प्रतिस्पर्धी बाजार की ओर मोड़ दिया।

1991 के सुधारों के कारण

संकट की पृष्ठभूमि
  • भुगतान संतुलन (BoP) संकट: विदेशी मुद्रा भंडार केवल 15 दिनों के आयात के लिए बचा था।
  • खाड़ी युद्ध: तेल की कीमतों में उछाल और प्रेषण (Remittances) में कमी।
  • उच्च राजकोषीय घाटा: सरकार का खर्च उसकी आय से काफी अधिक हो गया था।
  • मुद्रास्फीति: मुद्रास्फीति की दर ~17% तक पहुंच गई थी।

उदारीकरण के प्रमुख क्षेत्र

सुधारों के मुख्य घटक
  1. औद्योगिक क्षेत्र: लाइसेंस राज की समाप्ति (केवल 5 रणनीतिक उद्योगों को छोड़कर), लघु उद्योगों के लिए आरक्षण का उन्मूलन।
  2. वित्तीय क्षेत्र: आरबीआई की भूमिका 'नियामक' से 'सुविधाप्रदाता' में बदली, निजी बैंकों की अनुमति।
  3. कर सुधार: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों की दरों में कमी और सरलीकरण।
  4. विदेशी मुद्रा सुधार: रुपये का अवमूल्यन (Devaluation) और बाजार आधारित विनिमय दर।
  5. व्यापार और निवेश: आयात कोटा की समाप्ति, आयात शुल्क में कमी, एफडीआई बाधाओं को हटाना।

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

सकारात्मक प्रभाव
  • जीडीपी विकास: भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना।
  • विदेशी निवेश: एफडीआई (FDI) और एफपीआई (FPI) में भारी वृद्धि।
  • सेवा क्षेत्र का उदय: आईटी और बीपीओ क्षेत्र में भारत वैश्विक केंद्र बना।
  • उपभोक्ताओं के लिए विकल्प: बेहतर गुणवत्ता वाली वस्तुओं और सेवाओं तक पहुंच।
नकारात्मक प्रभाव/चुनौतियां
  • रोजगार रहित विकास (Jobless Growth): विकास हुआ लेकिन उस अनुपात में रोजगार नहीं बढ़े।
  • असमानता: अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी (ऑक्सफैम रिपोर्ट के अनुसार)।
  • कृषि की उपेक्षा: सुधारों का ध्यान मुख्य रूप से उद्योग और सेवाओं पर रहा, जिससे कृषि क्षेत्र पीछे रह गया।
  • बाजार निर्भरता: वैश्विक झटकों (जैसे 2008 संकट) के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी।

आगे का रास्ता

दूसरी पीढ़ी के सुधार (2nd Generation Reforms)
  • श्रम सुधार: निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लचीले श्रम कानून।
  • भूमि सुधार: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का सरलीकरण।
  • सार्वजनिक उपक्रम (PSU) सुधार: रणनीतिक विनिवेश और निजीकरण।
  • शिक्षा और कौशल: मानव पूंजी में निवेश ताकि 'जनसांख्यिकीय लाभांश' का लाभ मिल सके।