अभिवृत्ति परिवर्तन (Attitude Change)
अभिवृत्तियां सीखी जाती हैं, इसलिए उन्हें बदला भी जा सकता है। अभिवृत्ति परिवर्तन अनुनय (persuasion) और सामाजिक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
अभिवृत्ति परिवर्तन के सिद्धांत
1. संज्ञानात्मक असंगति सिद्धांत (Cognitive Dissonance Theory - Leo Festinger):
- अवधारणा: जब किसी व्यक्ति की अभिवृत्तियां और व्यवहार आपस में टकराते हैं (असंगति), तो मनोवैज्ञानिक असुविधा पैदा होती है।
- परिवर्तन: इस असुविधा को कम करने के लिए, व्यक्ति अक्सर अपनी अभिवृत्ति बदल लेता है ताकि वह व्यवहार के साथ मेल खाए।
- उदाहरण: एक व्यक्ति जो धूम्रपान करता है लेकिन जानता है कि यह हानिकारक है। वह या तो धूम्रपान छोड़ देगा (व्यवहार परिवर्तन) या खुद को मनाएगा कि जोखिम अतिरंजित हैं (अभिवृत्ति परिवर्तन)।
2. विस्तारण संभावना मॉडल (Elaboration Likelihood Model - Petty & Cacioppo): यह मॉडल बताता है कि अनुनय दो मार्गों से होता है:
| मार्ग | शर्तें | परिणाम |
|---|---|---|
| केंद्रीय मार्ग (Central Route) | जब व्यक्ति प्रेरित होता है और संदेश को समझने की क्षमता रखता है। तर्कों पर ध्यान केंद्रित करता है। | गहरी सोच; स्थायी अभिवृत्ति परिवर्तन। |
| परिधीय मार्ग (Peripheral Route) | जब प्रेरणा या क्षमता कम होती है। सतही संकेतों (जैसे वक्ता का आकर्षण) पर निर्भर करता है। | सतही सोच; अस्थायी परिवर्तन। |
3. आत्म-बोध सिद्धांत (Self-Perception Theory - Daryl Bem):
- हम अक्सर अपने व्यवहार को देखकर अपनी अभिवृत्तियों का अनुमान लगाते हैं।
- उदाहरण: "मैं अक्सर अनाथालय में दान करता हूं, इसलिए मैं बच्चों के कल्याण की परवाह करता हूं।"
अभिवृत्ति परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कारक
| कारक | प्रभाव |
|---|---|
| स्रोत की विश्वसनीयता | विशेषज्ञ और भरोसेमंद स्रोत (जैसे डॉक्टर, वैज्ञानिक) अधिक प्रेरक होते हैं। |
| संदेश की गुणवत्ता | तार्किक और मजबूत तर्क भावनात्मक अपीलों के साथ मिलकर अधिक प्रभावी होते हैं। |
| लक्षित दर्शक | दर्शकों की शिक्षा, आयु और बुद्धिमत्ता यह निर्धारित करती है कि वे संदेश को कैसे ग्रहण करेंगे। |
| माध्यम | वीडियो/ऑडियो संदेश लिखित संदेशों की तुलना में कभी-कभी अधिक प्रभावशाली हो सकते हैं। |
| भय अपील (Fear Appeals) | मध्यम स्तर का भय (जैसे तंबाकू विरोधी विज्ञापन) प्रभावी होता है, लेकिन बहुत अधिक भय रक्षात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है। |
प्रशासकों के लिए प्रासंगिकता
- जनजागरूकता: स्वच्छ भारत जैसे अभियानों में लोगों की स्वच्छता के प्रति अभिवृत्ति बदलना।
- टीकाकरण: टीकों के प्रति हिचकिचाहट को दूर करने के लिए विश्वसनीय स्रोतों (धार्मिक नेताओं) का उपयोग करना।
- सामाजिक सुधार: दहेज, जातिवाद जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ अभिवृत्ति बदलना।